राजस्थान के प्रमुख मेले: धार्मिक मेले एवं पशु मेले | Rajasthan Art & Culture Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान के प्रमुख मेले धार्मिक मेले एवं पशु मेले राजस्थान के प्रमुख मेले: धार्मिक मेले एवं पशु मेले | Rajasthan Art & Culture Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान के प्रमुख धार्मिक एवं पशु मेलों जैसे पुष्कर मेला, बेणेश्वर मेला, रामदेवरा मेला, गोगामेड़ी मेला, कैला देवी मेला, नागौर पशु मेला एवं तिलवाड़ा मेले का इतिहास, महत्व एवं परीक्षा उपयोगी तथ्यों का विस्तृत अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police, VDO एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण Rajasthan Art & Culture Notes।

परिचय

राजस्थान में मेले केवल व्यापार या मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये यहाँ की समृद्ध संस्कृति, धार्मिक आस्था और लोक-जीवन का जीवंत दर्पण हैं। राजस्थान में मेलों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है: धार्मिक / सांस्कृतिक मेले और पशु मेले (Animal Fairs)। पशुपालन विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राज्य स्तर पर 10 बड़े पशु मेलों का आयोजन किया जाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RSMSSB, REET) में आदिवासियों के कुंभ, मेलों की तिथियों (हिन्दू पंचांग के अनुसार), पशु मेलों की नस्लों और पर्यटन विभाग (RTDC) द्वारा आयोजित महोत्सवों के स्थानों से निश्चित रूप से ‘सुमेलित कीजिए’ वाले प्रश्न आते हैं। आइए, इनका विस्तार से अध्ययन करें।

1. राजस्थान के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक मेले

A. पुष्कर मेला (अजमेर)

  • तिथि: कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर माह में)।
  • विशेषता: यह राजस्थान का सबसे रंगीन मेला (Most Colourful Fair) है। इसे ‘तीर्थराज’, ‘कोंकण तीर्थ’ और ‘मेरवाड़ा का कुंभ’ भी कहा जाता है।
  • प्रमुख आकर्षण: ऊँटों की बिक्री, ब्रह्मा जी का एकमात्र मुख्य मंदिर, और पुष्कर झील में दीपदान (Deepdaan) की परंपरा।

B. बेणेश्वर मेला (डूंगरपुर)

  • तिथि: माघ पूर्णिमा।
  • स्थान: नवाटापरा गाँव (सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर)।
  • विशेषता: इसे ‘आदिवासियों का कुंभ’ (Kumbh of Tribals), वागड़ का कुंभ और भीलों का कुंभ कहा जाता है। यहाँ खंडित शिवलिंग की पूजा होती है। इस धाम की स्थापना संत मावजी ने की थी।

C. रामदेवरा मेला (जैसलमेर)

  • तिथि: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बाबे री बीज) से एकादशी तक।
  • विशेषता: यह राजस्थान का साम्प्रदायिक सद्भाव (Communal Harmony) का सबसे बड़ा मेला है। इसे ‘मारवाड़ का कुंभ’ कहा जाता है। यहाँ ‘तेरह ताली’ नृत्य मुख्य आकर्षण होता है।

D. सीताबाड़ी का मेला (बारां)

  • तिथि: ज्येष्ठ अमावस्या।
  • स्थान: केलवाड़ा (बारां)।
  • विशेषता: यह हाड़ौती अंचल का सबसे बड़ा मेला है और इसे ‘सहरिया जनजाति का कुंभ’ (Kumbh of Sahariya Tribe) कहा जाता है।

E. अन्य प्रमुख धार्मिक मेले

  • खाटू श्याम जी का मेला (सीकर): फाल्गुन शुक्ल एकादशी और द्वादशी को (बर्बरीक की पूजा)।
  • भर्तृहरि मेला (अलवर): भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को। यह ‘कनफटे नाथों’ का सबसे बड़ा तीर्थ है।
  • कैला देवी का मेला (करौली): चैत्र शुक्ल अष्टमी को त्रिकूट पर्वत पर। इसे ‘लक्खी मेला’ (Lakkhi Mela) कहते हैं। (लांगुरिया नृत्य प्रसिद्ध है)।
  • कोलायत मेला (बीकानेर): कार्तिक पूर्णिमा को। यहाँ सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि का आश्रम है। पुष्कर की तरह यहाँ भी ‘दीपदान’ होता है। (इस मेले में चारण जाति के लोग भाग नहीं लेते हैं)।
  • गलियाकोट का उर्स (डूंगरपुर): माही नदी के किनारे बोहरा सम्प्रदाय के संत ‘सैय्यद फखरुद्दीन’ की मजार पर यह उर्स भरता है।

2. राजस्थान के प्रमुख पशु मेले (State-Level Animal Fairs)

राजस्थान में सर्वाधिक पशु मेलों का आयोजन नागौर जिले में होता है।

पशु मेले का नामस्थान और जिलातिथि / माहप्रमुख पशु नस्ल
वीर तेजाजी पशु मेलापरबतसर (नागौर)श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्यानागौरी बैल (आय की दृष्टि से सबसे बड़ा मेला)
मल्लीनाथ पशु मेलातिलवाड़ा (बालोतरा)चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशीथारपारकर व कांकरेज (लूनी नदी के किनारे, सबसे प्राचीन)
गोमती सागर पशु मेलाझालरापाटन (झालावाड़)वैशाख पूर्णिमामालवी नस्ल (हाड़ौती का सबसे बड़ा पशु मेला)
चंद्रभागा पशु मेलाझालरापाटन (झालावाड़)कार्तिक पूर्णिमामालवी नस्ल (चंद्रभागा नदी के किनारे)
पुष्कर पशु मेलापुष्कर (अजमेर)कार्तिक शुक्ल अष्टमी से मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीयागिर नस्ल (इसे रेंडा या अजमेरा भी कहते हैं)
गोगामेड़ी पशु मेलानोहर (हनुमानगढ़)श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद पूर्णिमाहरियाणवी नस्ल (सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला मेला)
महाशिवरात्रि पशु मेलाकरौलीफाल्गुन कृष्ण त्रयोदशीहरियाणवी नस्ल
जसवंत पशु मेलाभरतपुरआश्विन माह (दशहरे के आस-पास)हरियाणवी नस्ल

3. राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) के प्रमुख महोत्सव

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए RTDC द्वारा विभिन्न जिलों में महोत्सव आयोजित किए जाते हैं। परीक्षा में इनका स्थान और महीना (Month) बहुत बार पूछा जाता है:

  • ऊँट महोत्सव (Camel Festival): बीकानेर (जनवरी)।
  • मरु महोत्सव (Desert Festival): जैसलमेर (जनवरी-फरवरी)।
  • थार महोत्सव (Thar Festival): बाड़मेर (फरवरी-मार्च)।
  • हाथी महोत्सव (Elephant Festival): जयपुर (मार्च – होली के अवसर पर)।
  • मारवाड़ महोत्सव (Marwar Festival): जोधपुर (अक्टूबर – शरद पूर्णिमा के अवसर पर)।
  • शरद और ग्रीष्म महोत्सव (Winter & Summer Festivals): माउंट आबू (सिरोही)।
  • बैलून महोत्सव (Balloon Festival): बाड़मेर।
  • मीरा महोत्सव: चित्तौड़गढ़ (शरद पूर्णिमा)।

परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)

  • बाणगंगा मेला: यह वैशाख पूर्णिमा को विराटनगर (जयपुर ग्रामीण) में भरता है।
  • मानगढ़ धाम मेला: यह मार्गशीर्ष पूर्णिमा को बांसवाड़ा में भरता है। (गोविंद गिरी के नेतृत्व में यहाँ 1913 में भील शहीद हुए थे)।
  • कल्याण जी का मेला: यह श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को डिग्गी (मालपुरा) में भरता है। मुस्लिम इन्हें ‘कलहपीर’ कहते हैं।
  • चैत्र माह के प्रमुख मेले: शीतला माता का मेला (चाकसू), ऋषभदेव मेला (धुलेव, उदयपुर), और श्री महावीर जी का मेला (करौली)।

अभ्यास हेतु 20 महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs)

प्रश्न 1: राजस्थान का ‘सबसे रंगीन मेला’ और ‘मेरवाड़ा का कुंभ’ किस मेले को कहा जाता है?

उत्तर: पुष्कर मेले (अजमेर) को।

प्रश्न 2: पुष्कर मेले का आयोजन हिन्दू पंचांग के अनुसार किस तिथि को होता है?

उत्तर: कार्तिक पूर्णिमा को।

प्रश्न 3: ‘आदिवासियों का कुंभ’ (Kumbh of Tribals) के नाम से प्रसिद्ध बेणेश्वर मेला राजस्थान के किस जिले में भरता है?

उत्तर: डूंगरपुर जिले में (नवाटापरा गाँव)।

प्रश्न 4: बेणेश्वर मेला किन तीन नदियों के त्रिवेणी संगम पर आयोजित होता है?

उत्तर: सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर।

प्रश्न 5: बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर) में मेले का आयोजन किस तिथि को होता है?

उत्तर: माघ पूर्णिमा को।

प्रश्न 6: हाड़ौती अंचल का सबसे बड़ा मेला जिसे ‘सहरिया जनजाति का कुंभ’ कहा जाता है?

उत्तर: सीताबाड़ी का मेला (केलवाड़ा, बारां)।

प्रश्न 7: राजस्थान में साम्प्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा मेला कौन सा है?

उत्तर: रामदेवरा मेला (जैसलमेर)।

प्रश्न 8: अलवर में ‘कनफटे नाथों’ का प्रसिद्ध तीर्थ मेला किस संत की स्मृति में भरता है?

उत्तर: भर्तृहरि (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी)।

प्रश्न 9: कपिल मुनि का मेला कार्तिक पूर्णिमा को कहाँ आयोजित होता है, जहाँ पुष्कर के समान ‘दीपदान’ की परंपरा है?

उत्तर: कोलायत (बीकानेर) में।

प्रश्न 10: राजस्थान में पशु मेलों का सर्वाधिक आयोजन किस जिले में होता है?

उत्तर: नागौर जिले में।

प्रश्न 11: राजस्थान का ‘सबसे प्राचीन’ पशु मेला कौन सा है जो लूनी नदी के किनारे तिलवाड़ा (बालोतरा) में भरता है?

उत्तर: मल्लीनाथ पशु मेला।

प्रश्न 12: मल्लीनाथ पशु मेले में मुख्य रूप से किस नस्ल के पशुओं का क्रय-विक्रय होता है?

उत्तर: थारपारकर और कांकरेज नस्ल के।

प्रश्न 13: आय (राजस्व) की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला कौन सा है?

उत्तर: वीर तेजाजी पशु मेला (परबतसर, नागौर)।

प्रश्न 14: वीर तेजाजी पशु मेले में किस नस्ल के बैलों की सर्वाधिक बिक्री होती है?

उत्तर: नागौरी बैलों की।

प्रश्न 15: हाड़ौती क्षेत्र के प्रसिद्ध ‘गोमती सागर’ और ‘चंद्रभागा’ पशु मेले किस स्थान पर आयोजित होते हैं?

उत्तर: झालरापाटन (झालावाड़) में।

प्रश्न 16: ‘हरियाणवी नस्ल’ के पशुओं के लिए प्रसिद्ध गोगामेड़ी पशु मेला (नोहर) किस जिले में आयोजित होता है?

उत्तर: हनुमानगढ़ जिले में।

प्रश्न 17: पर्यटन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष जनवरी माह में ‘ऊँट महोत्सव’ (Camel Festival) कहाँ आयोजित किया जाता है?

उत्तर: बीकानेर में।

प्रश्न 18: ‘मरु महोत्सव’ (Desert Festival) राजस्थान के किस जिले का प्रमुख आकर्षण है?

उत्तर: जैसलमेर का।

प्रश्न 19: मार्च (होली के अवसर पर) ‘हाथी महोत्सव’ (Elephant Festival) का आयोजन कहाँ किया जाता है?

उत्तर: जयपुर में।

प्रश्न 20: ‘थार महोत्सव’ का आयोजन पर्यटन विभाग द्वारा किस जिले में किया जाता है?

उत्तर: बाड़मेर में।

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