राजस्थान के लोक नृत्य: क्षेत्रीय, जातीय एवं व्यावसायिक नृत्य | Rajasthan Art & Culture Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान के लोक नृत्य क्षेत्रीय जातीय एवं व्यावसायिक नृत्य Rajasthan राजस्थान के लोक नृत्य: क्षेत्रीय, जातीय एवं व्यावसायिक नृत्य | Rajasthan Art & Culture Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्यों जैसे घूमर, कालबेलिया, गैर, भवई, चरी, तेरहताली, कच्छी घोड़ी, गवरी एवं क्षेत्रीय, जातीय और व्यावसायिक लोक नृत्यों का इतिहास, विशेषताएँ एवं परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्यों का सम्पूर्ण अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police, VDO एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण Rajasthan Art & Culture Notes।

परिचय राजस्थान की रंग-बिरंगी संस्कृति की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति यहाँ के लोक नृत्यों (Folk Dances) में देखने को मिलती है। खुशी का अवसर हो, नई फसल का आगमन हो या किसी लोक देवता का मेला—राजस्थानी जनमानस अपने भावों को नृत्यों के माध्यम से ही प्रकट करता है।

अध्ययन की दृष्टि से राजस्थान के लोक नृत्यों को तीन मुख्य भागों में बांटा जाता है: 1. क्षेत्रीय नृत्य (Regional), 2. जातीय/जनजातीय नृत्य (Tribal), और 3. व्यावसायिक नृत्य (Professional)

प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RSMSSB, REET) में कालबेलिया नृत्यों, वालर नृत्य (बिना वाद्य यंत्र), भवाई नृत्य के नर्तकों और ‘थाकना शैली’ से निश्चित रूप से प्रश्न आते हैं। महारथ अकादमी के इस नोट्स में हम इन नृत्यों को कुछ शानदार ‘ट्रिक्स’ के साथ याद करेंगे।

1. राजस्थान के प्रमुख क्षेत्रीय लोक नृत्य (Regional Folk Dances)

ये नृत्य किसी विशेष क्षेत्र या अंचल में प्रसिद्ध हैं।

  • घूमर (Ghoomar): यह राजस्थान का ‘राज्य नृत्य’ (State Dance) है। इसे नृत्यों का सिरमौर और नृत्यों की ‘आत्मा’ कहा जाता है। यह महिलाओं द्वारा मांगलिक अवसरों पर किया जाता है। इसमें लहंगे के घेर को ‘घूम’ और हाथों के लचकदार संचालन को ‘सवाई’ कहते हैं।
  • ढोल नृत्य (Jalore): यह जालोर क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य है जो पुरुषों द्वारा विवाह के अवसर पर किया जाता है। इसे ‘थाकना शैली’ (Thakna Style) में बजाया जाता है। इस नृत्य को प्रकाश में लाने का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास को है।
  • बम नृत्य (Bam Dance – भरतपुर/अलवर): यह मेवात क्षेत्र में नई फसल के आने की खुशी और होली के अवसर पर पुरुषों द्वारा किया जाता है। इसमें बड़े नगाड़े (जिसे ‘बम’ कहते हैं) का प्रयोग होता है। इसके साथ गाए जाने वाले गीत को ‘बम-रसिया’ कहते हैं।
  • अग्नि नृत्य (Bikaner): यह कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय के सिद्ध पुरुषों द्वारा धधकते अंगारों पर किया जाता है। नर्तक ‘फतेह-फतेह’ का उच्चारण करते हैं। (यह क्षेत्रीय और धार्मिक दोनों है)।
  • गींदड़ और चंग नृत्य (Shekhawati): ये दोनों नृत्य शेखावाटी (सीकर, चूरू, झुंझुनूं) में होली के अवसर पर केवल पुरुषों द्वारा किए जाते हैं।
  • घुड़ला नृत्य (Jodhpur): यह मारवाड़ क्षेत्र में महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसमें महिलाएं सिर पर एक छिद्रित मटका (जिसमें दीपक जलता है) रखकर नृत्य करती हैं। यह राव सातल की घुड़ले खां पर विजय की याद में मनाया जाता है।
  • डांडिया (Dandia): यह मारवाड़ (जोधपुर) का प्रसिद्ध है।

2. जातीय और जनजातीय लोक नृत्य (Tribal / Caste-based Dances)

परीक्षाओं में सबसे ज्यादा ‘सुमेलित कीजिए’ वाले प्रश्न यहीं से आते हैं।

A. कालबेलिया जाति के नृत्य (Kalbelia Dances)

याद रखने की ट्रिक: “BYPASS” (B- बागड़िया, I- इंडोणी, P- पणिहारी, S- संक्रिया)

  1. बागड़िया (Bagadiya): यह कालबेलिया महिलाओं द्वारा भीख मांगते समय (चंग वाद्य यंत्र के साथ) किया जाता है।
  2. इंडोणी व पणिहारी: ये दोनों युगल (Couple) नृत्य हैं।
  3. संक्रिया (Sankriya): यह एक प्रेम-कथा पर आधारित सबसे आकर्षक युगल नृत्य है।
  • विशेष: 2010 में यूनेस्को (UNESCO) ने कालबेलिया नृत्य को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया। गुलाबो सपेरा (Gulabo Sapera) इसकी विश्व प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं।

B. भील जनजाति के नृत्य (Bhil Dances)

ट्रिक: “भीलों की गवरी गैरों के युद्ध में द्विचकरी नाची”

  1. गवरी / राई नृत्य: यह मेवाड़ क्षेत्र में 40 दिन तक चलने वाला सबसे प्राचीन लोक नाट्य/नृत्य है। यह शिव-भस्मासुर की कथा पर आधारित है और केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है।
  2. गैर नृत्य: मेवाड़ और बाड़मेर (कनाना गाँव) का प्रसिद्ध।
  3. नेजा (Neja): यह होली के बाद भीलों और मीणों द्वारा किया जाने वाला एक खेल नृत्य (Sports Dance) है, जिसमें एक खंभे से नारियल उतारा जाता है।
  4. द्विचकरी: यह विवाह के अवसर पर महिला और पुरुष दोनों द्वारा दो वृत्त (Circles) बनाकर किया जाता है।

C. गरासिया जनजाति के नृत्य (Garasia Dances)

ट्रिक: “गोलू मामा ज्वारा कूदो” (गो- गोल, लू- लूर, मा- मांदल, मो- मोरिया, ज- जवारा, वा- वालर, कू- कूद)

  1. वालर (Walar): यह गरासियों का सबसे प्रसिद्ध नृत्य है जिसे ‘गरासियों की घूमर’ कहते हैं। यह बिना किसी वाद्य यंत्र (Without Instrument) के धीमी गति से किया जाता है। (सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला प्रश्न)।
  2. लूर (Lur): यह मेले या शादी में महिलाओं द्वारा किया जाता है, जिसमें गोत्र की महिलाएं रिश्ते की मांग करती हैं।
  3. कूद (Kud): यह भी बिना वाद्य यंत्र के तालियों की थाप पर होता है।

D. अन्य जातियों के प्रसिद्ध नृत्य

  • गुर्जर जाति – चरी नृत्य (Chari): यह किशनगढ़ (अजमेर) का प्रसिद्ध है। महिलाएं सिर पर पीतल की चरी (मटका) रखकर उसमें जलते हुए काकड़े (कपास के बीज) रखकर नृत्य करती हैं। फलकू बाई इसकी प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं।
  • कंजर जाति – चकरी और धाकड़: ‘चकरी’ नृत्य में महिलाएं 80 कली का लहंगा पहनकर तेज गति से चक्कर लगाती हैं। (हाड़ौती में प्रसिद्ध)।
  • सहरिया जाति – शिकारी नृत्य: बारां जिले में सहरिया पुरुषों द्वारा शिकार का अभिनय करते हुए।

3. व्यावसायिक लोक नृत्य (Professional Folk Dances)

ये नृत्य मुख्य रूप से आजीविका कमाने (कला प्रदर्शन) के लिए किए जाते हैं।

A. भवाई नृत्य (Bhavai Dance)

  • क्षेत्र: मेवाड़ क्षेत्र (उदयपुर संभाग)।
  • विशेषता: यह नृत्य अपने शारीरिक संतुलन (Physical Balance) और अद्भुत करतबों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसमें 7-8 मटके सिर पर रखकर नाचना, नंगी तलवारों, कांच के टुकड़ों और थाली के किनारों पर नाचना शामिल है।
  • प्रसिद्ध नर्तक: रूप सिंह शेखावत, दयाराम, अस्मिता काला (इन्होंने सिर पर 111 मटके रखकर लिम्का बुक में नाम दर्ज कराया), और श्रेष्ठा सोनी (लिटिल वंडर)।

B. तेरहताली नृत्य (Terah Taali)

  • अवसर व जाति: यह रामदेवजी के मेले का मुख्य आकर्षण है और कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा बैठकर किया जाता है।
  • वाद्य यंत्र: इसमें शरीर पर 13 मंजीरे (9 दाएँ पैर पर, 2 कोहनी पर, 2 हाथों में) बांधे जाते हैं।
  • उद्गम व नृत्यांगना: इस नृत्य का उद्गम पादरला गाँव (पाली) माना जाता है। इसकी प्रसिद्ध नृत्यांगना मांगी बाई हैं।

C. कच्ची घोड़ी नृत्य (Kacchi Ghodi)

  • क्षेत्र: शेखावाटी (सीकर, चूरू, झुंझुनूं)।
  • विशेषता: यह पुरुषों द्वारा विवाह के अवसर पर किया जाता है। नर्तक बांस की बनी घोड़ी को अपनी कमर से बांधकर युद्ध का अभिनय करते हैं।
  • पैटर्न (Pattern): इसमें नर्तक जब आगे-पीछे होते हैं तो ऐसा लगता है जैसे ‘फूल खिल रहा हो और बंद हो रहा हो’ (Pattern making)। इसमें ‘झांझ’ और ‘बांकिया’ वाद्य यंत्र बजते हैं।

अभ्यास हेतु 20 महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs)

प्रश्न 1: राजस्थान का ‘राज्य नृत्य’ (State Dance) कौन सा है, जिसे नृत्यों की आत्मा कहा जाता है? उत्तर: घूमर।

प्रश्न 2: घूमर नृत्य में हाथों के लचकदार संचालन को क्या कहा जाता है? उत्तर: सवाई (Sawai)।

प्रश्न 3: जालोर का प्रसिद्ध ‘ढोल नृत्य’ किस शैली में बजाया जाता है? उत्तर: थाकना शैली (Thakna Style) में।

प्रश्न 4: नई फसल के आने पर मेवात (भरतपुर-अलवर) क्षेत्र में पुरुषों द्वारा कौन सा नृत्य किया जाता है? उत्तर: बम नृत्य (Bam Dance)।

प्रश्न 5: बीकानेर के कतरियासर गाँव में जसनाथी सम्प्रदाय द्वारा कौन सा नृत्य किया जाता है? उत्तर: अग्नि नृत्य।

प्रश्न 6: मारवाड़ में महिलाओं द्वारा सिर पर छिद्रित मटके में दीपक रखकर कौन सा नृत्य किया जाता है? उत्तर: घुड़ला नृत्य।

प्रश्न 7: कालबेलिया नृत्यों को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व अमूर्त धरोहर सूची में किस वर्ष शामिल किया गया? उत्तर: 2010 में।

प्रश्न 8: गुलाबो सपेरा (Gulabo Sapera) का संबंध किस लोक नृत्य से है? उत्तर: कालबेलिया नृत्य से।

प्रश्न 9: कालबेलिया महिलाओं द्वारा भीख मांगते समय चंग वाद्य यंत्र के साथ कौन सा नृत्य किया जाता है? उत्तर: बागड़िया नृत्य।

प्रश्न 10: भील जनजाति का वह कौन सा नृत्य है जो एक प्रकार का खेल नृत्य (Sports Dance) है? उत्तर: नेजा (Neja)।

प्रश्न 11: मेवाड़ में शिव-भस्मासुर की कथा पर आधारित 40 दिन तक चलने वाला लोक नृत्य/नाट्य कौन सा है? उत्तर: गवरी / राई नृत्य।

प्रश्न 12: गरासिया जनजाति का वह कौन सा नृत्य है जो बिना किसी वाद्य यंत्र (Without Instrument) के किया जाता है? उत्तर: वालर (Walar)।

प्रश्न 13: किशनगढ़ (अजमेर) की ‘फलकू बाई’ का संबंध किस लोक नृत्य से है? उत्तर: चरी नृत्य (गुर्जर जाति)।

प्रश्न 14: सहरिया जनजाति के पुरुषों द्वारा शिकार का अभिनय करते हुए कौन सा नृत्य किया जाता है? उत्तर: शिकारी नृत्य।

प्रश्न 15: हाड़ौती क्षेत्र में कंजर जाति की महिलाओं द्वारा 80 कली का लहंगा पहनकर कौन सा तेज गति वाला नृत्य किया जाता है? उत्तर: चकरी नृत्य।

प्रश्न 16: सिर पर अनेक मटके रखकर, तलवारों और कांच पर नाचने वाला अद्भुत शारीरिक संतुलन का नृत्य कौन सा है? उत्तर: भवाई नृत्य (मेवाड़)।

प्रश्न 17: भवाई नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यांगना जिसने सिर पर 111 मटके रखकर रिकॉर्ड बनाया था, उनका नाम क्या है? उत्तर: अस्मिता काला।

प्रश्न 18: रामदेवजी के मेले में कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा बैठकर कौन सा नृत्य किया जाता है? उत्तर: तेरहताली नृत्य।

प्रश्न 19: तेरहताली नृत्य का उद्गम स्थान कौन सा गाँव माना जाता है और इसकी प्रसिद्ध नृत्यांगना कौन हैं? उत्तर: पादरला गाँव (पाली), नृत्यांगना: मांगी बाई।

प्रश्न 20: शेखावाटी में पुरुषों द्वारा विवाह पर किया जाने वाला वह नृत्य कौन सा है जिसमें ‘फूल के खिलने और बंद होने’ (Pattern making) का आभास होता है? उत्तर: कच्ची घोड़ी नृत्य।

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