
परिचय
मेवाड़ के महान शासकों राणा सांगा, महाराणा प्रताप एवं उनके उत्तराधिकारी शासकों का विस्तृत इतिहास पढ़ें। हल्दीघाटी युद्ध, दिवेर युद्ध, मुगलों से संघर्ष एवं परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्यों सहित सम्पूर्ण Rajasthan History Notes, RPSC, CET, REET, Patwar, Police एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए।
मेवाड़ के इतिहास की इस दूसरी कड़ी में हम उन महान शूरवीरों का अध्ययन करेंगे जिन्होंने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए दिल्ली की विशाल मुगल सल्तनत से लोहा लिया। राणा सांगा का अदम्य साहस, पन्ना धाय का अतुलनीय बलिदान और महाराणा प्रताप का स्वाधीनता संग्राम न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। प्रतियोगी परीक्षाओं में हल्दीघाटी, खानवा के युद्ध और अकबर द्वारा भेजे गए शिष्टमंडलों से लगातार प्रश्न पूछे जाते हैं।
आइए, मेवाड़ के इस गौरवशाली इतिहास का विस्तार से अध्ययन करें।
1. महाराणा संग्राम सिंह / राणा सांगा (1509 – 1528 ई.)
राणा सांगा को राजपूताना के सभी राजपूत शासकों को एक झंडे के नीचे एकत्र करने वाला अंतिम महान हिंदू सम्राट माना जाता है।
- प्रमुख उपाधियां:
- हिन्दूपथ (Hindupath): मुस्लिम शासकों के विरुद्ध हिंदू राजाओं का नेतृत्व करने के कारण।
- सैनिक भग्नावशेष (Remains of a Soldier): कर्नल जेम्स टॉड ने इन्हें यह उपाधि दी थी, क्योंकि सांगा के शरीर पर युद्धों के 80 घाव थे और वे एक आँख, एक हाथ और एक पैर गँवा चुके थे।
राणा सांगा के प्रमुख युद्ध (Battles of Rana Sanga)
- खातौली का युद्ध (1517 ई.): यह युद्ध वर्तमान कोटा (उस समय बूंदी) के खातौली नामक स्थान पर दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी और सांगा के मध्य हुआ। इसमें सांगा विजयी हुए, लेकिन उन्होंने अपना एक हाथ और पैर खो दिया।
- बाड़ी का युद्ध (1518 ई.): धौलपुर के बाड़ी में सांगा ने पुनः इब्राहिम लोदी की सेना को पराजित किया।
- गागरोन का युद्ध (1519 ई.): झालावाड़ के गागरोन में सांगा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय को हराकर बंदी बना लिया।
- बयाना का युद्ध (16 फरवरी 1527): भरतपुर के बयाना दुर्ग पर अधिकार के लिए सांगा ने मुग़ल सम्राट बाबर की सेना को बुरी तरह पराजित किया।
- खानवा का युद्ध (17 मार्च 1527):
- यह युद्ध रूपवास तहसील (भरतपुर) में गम्भीरी नदी के किनारे बाबर और राणा सांगा के मध्य हुआ।
- पाती पेरवन प्रथा: सांगा ने राजपूताना के सभी राजाओं को युद्ध में शामिल होने के लिए पत्र (पाती) भेजे। (मारवाड़ से मालदेव, आमेर से पृथ्वीराज, बीकानेर से कल्याणमल आदि आए)।
- बाबर की रणनीति: बाबर ने इस युद्ध को ‘जिहाद’ (धर्मयुद्ध) घोषित किया और तुलुगमा युद्ध पद्धति (सेना को तीन भागों में बांटकर घेरना) तथा तोपखाने का प्रयोग किया।
- परिणाम: सांगा के सेनापति शैलहदी तंवर द्वारा विश्वासघात करने और तोपखाने के प्रयोग के कारण सांगा की पराजय हुई। युद्ध भूमि में घायल सांगा का राजमुकुट झाला अज्जा (काठियावाड़) ने धारण किया।
- मृत्यु और छतरी: सांगा को उनके ही सरदारों ने काल्पी (मध्य प्रदेश) में जहर दे दिया, जहाँ 30 जनवरी 1528 को उनकी मृत्यु हो गई। सांगा का दाह संस्कार मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में हुआ, जहाँ उनकी 8 खंभों की छतरी बनी हुई है। इनका चबूतरा बसवा (दौसा) में स्थित है।
2. महाराणा उदयसिंह और चित्तौड़ का तीसरा साका
राणा सांगा की मृत्यु के बाद रतनसिंह द्वितीय और विक्रमादित्य शासक बने। विक्रमादित्य के समय दासी पुत्र बनवीर ने मेवाड़ की सत्ता हथिया ली।
- पन्ना धाय का बलिदान: 1536 ई. में जब बनवीर बाल्यकाल में उदयसिंह को मारने आया, तब उनकी धाय माँ ‘पन्ना धाय’ ने अपने सगे पुत्र चंदन को उदयसिंह की जगह लिटाकर उसका बलिदान दे दिया और उदयसिंह को सुरक्षित कुंभलगढ़ भिजवा दिया।
- उदयपुर की स्थापना: उदयसिंह ने 1559 ई. में पिछोला झील के पास उदयपुर शहर बसाया और ‘उदयसागर झील’ का निर्माण करवाया।
चित्तौड़ का तीसरा साका (1567-1568 ई.)
- अक्टूबर 1567 में अकबर ने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया। उदयसिंह किले का भार अपने सेनापतियों (जयमल और फत्ता) को सौंपकर गोगुंदा की पहाड़ियों में चले गए।
- केसरिया: वीर सेनापति जयमल राठौड़ और फत्ता चुंडावत (पत्ता) के नेतृत्व में राजपूतों ने केसरिया किया। कल्लाजी राठौड़ (चार हाथों वाले लोक देवता) ने जयमल को अपने कंधों पर बिठाकर युद्ध किया।
- जौहर: फत्ता चुंडावत की पत्नी फूल कंवर के नेतृत्व में महिलाओं ने जौहर किया। यह चित्तौड़ का तीसरा और अंतिम साका था।
- अकबर ने जयमल और फत्ता की वीरता से प्रभावित होकर आगरा के किले (कुछ स्रोतों में जूनागढ़) के मुख्य द्वार पर उनकी हाथी पर सवार (गजारूढ़) मूर्तियां स्थापित करवाईं।
3. महाराणा प्रताप (1572 – 1597 ई.)
महाराणा प्रताप को राजस्थान के इतिहास में स्वाधीनता का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।
- जन्म: 9 मई 1540 (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया) को कुंभलगढ़ दुर्ग के कटारगढ़ (बादल महल की जूनी कचहरी) में।
- माता-पिता: पिता उदयसिंह और माता जयवंता बाई (पाली के अखैराज सोनगरा की पुत्री)।
- बचपन का नाम: भीलों में इन्हें प्यार से ‘कीका’ (Kika) कहा जाता था।
- राज्याभिषेक: 28 फरवरी 1572 (होली के दिन) को गोगुंदा (Gogunda) में। इनका विधिवत (औपचारिक) राज्याभिषेक कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था।
अकबर द्वारा भेजे गए चार शिष्टमंडल (Emissaries of Akbar)
अकबर ने प्रताप को अधीनता स्वीकार करवाने के लिए 4 दूत भेजे थे। इन्हें क्रम से याद रखने की ट्रिक है: ‘जमाभटो’ (Ja-Ma-Bha-To)
- ज – जलाल खां कोरची (नवंबर 1572)
- मा – मानसिंह (कछवाहा) (जून 1573)
- भ – भगवंत दास (अक्टूबर 1573)
- टो – टोडरमल (दिसंबर 1573)प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार नहीं की, जिसके परिणामस्वरूप हल्दीघाटी का युद्ध हुआ।
हल्दीघाटी का युद्ध (18 जून 1576)
- स्थान: राजसमंद जिले में खमनोर और गोगुंदा की पहाड़ियों के बीच।
- सेनापति: मुग़ल सेना का मुख्य सेनापति मानसिंह (कछवाहा) और आसफ खां थे। प्रताप की सेना के हरावल (सबसे आगे वाले भाग) का नेतृत्व अफगान मुस्लिम सेनापति हाकिम खां सूरी ने किया था।
- ऐतिहासिक नामकरण:
- कर्नल जेम्स टॉड: मेवाड़ की थर्मोपल्ली (Thermopylae of Mewar)।
- अबुल फजल: खमनोर का युद्ध।
- बदायूंनी: गोगुंदा का युद्ध (बदायूंनी ने इस युद्ध का आँखों देखा वर्णन अपनी पुस्तक ‘मुंतखब-उत-तवारीख’ में किया है)।
- युद्ध की घटना: प्रताप के घोड़े ‘चेतक’ के घायल होने पर प्रताप को युद्ध मैदान से सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रताप का राजमुकुट सादड़ी के झाला बीदा (मन्ना) ने धारण कर वीरगति पाई। चेतक की छतरी बलीचा (राजसमंद) में स्थित है।
दिवेर का युद्ध (1582 ई.)
- इस युद्ध में महाराणा प्रताप और उनके पुत्र अमरसिंह ने मुगलों की छावनी पर अचानक आक्रमण किया और अकबर के चाचा सुल्तान खान को मार गिराया।
- यह प्रताप की मुगलों पर एक बहुत बड़ी विजय थी। कर्नल जेम्स टॉड ने इस युद्ध को ‘मेवाड़ का मैराथन’ (Marathon of Mewar) कहा है।
चावंड राजधानी और मृत्यु
- 1585 ई. में प्रताप ने लूणा चावंडिया को हराकर चावंड (Chavand) को अपनी आपातकालीन राजधानी बनाया, जो अगले 28 वर्षों तक मेवाड़ की राजधानी रही।
- 19 जनवरी 1597 को धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय चोट लगने से चावंड में प्रताप का देहांत हो गया। बांडोली (उदयपुर) में उनकी 8 खंभों की छतरी बनी हुई है।
4. महाराणा अमरसिंह प्रथम और मुगल-मेवाड़ संधि
प्रताप के बाद उनके पुत्र अमरसिंह शासक बने। मुगलों के लगातार आक्रमणों और मेवाड़ की जर्जर आर्थिक स्थिति के कारण सरदारों के दबाव में अमरसिंह को मुगलों से संधि करनी पड़ी।
- मुगल-मेवाड़ संधि (5 फरवरी 1615): यह संधि दिल्ली के सम्राट जहांगीर और महाराणा अमरसिंह के मध्य हुई। मुगलों की ओर से खुर्रम (शाहजहां) ने इसका प्रतिनिधित्व किया था।
- प्रमुख शर्तें:
- महाराणा कभी मुग़ल दरबार में उपस्थित नहीं होंगे (उनके स्थान पर युवराज कर्णसिंह जाएंगे)।
- मुगलों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग मेवाड़ को वापस दे दिया जाएगा, लेकिन मेवाड़ के शासक इसका जीर्णोद्धार (Repairs) नहीं करवाएंगे।
5. महाराणा राजसिंह (1652 – 1680 ई.)
ये मेवाड़ के एक अत्यंत साहसी और कला-प्रेमी शासक थे, जिन्होंने मुग़ल सम्राट औरंगजेब की कट्टर नीतियों का खुलकर विरोध किया।
- उपाधि: ‘विजय कटकातु’ (सेनाओं को जीतने वाला) और ‘हाइड्रोलिक रूलर’।
- औरंगजेब से विरोध के कारण:
- किशनगढ़ की चारुमती से विवाह: औरंगजेब चारुमती से विवाह करना चाहता था, लेकिन चारुमती के अनुरोध पर राजसिंह ने उससे विवाह कर औरंगजेब को चुनौती दी।
- जजिया कर का विरोध: 1679 ई. में औरंगजेब द्वारा हिंदुओं पर लगाए गए ‘जजिया कर’ का राजसिंह ने पत्र लिखकर कड़ा विरोध किया।
- मूर्तियों को संरक्षण: औरंगजेब के मूर्ति भंजन आदेश के बाद, मथुरा से आए गोसाईं पुजारियों को शरण दी और सिहाड़ (वर्तमान नाथद्वारा) में श्रीनाथजी का मंदिर तथा कांकरोली में द्वारकाधीश का मंदिर बनवाया।
- राजसमंद झील का निर्माण: राजसिंह ने अकाल राहत कार्यों के तहत गोमती नदी के पानी को रोककर राजसमंद झील का निर्माण करवाया। इसकी उत्तरी पाल (नौ चौकी पाल) पर ‘राजप्रशस्ति’ (25 काले पत्थरों पर रणछोड़ भट्ट द्वारा लिखित) उत्कीर्ण करवाई।
परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की ओर से लड़ने वाले एकमात्र मुस्लिम सेनापति हाकिम खां सूरी थे।
- हल्दीघाटी युद्ध में मुगलों की ओर से ‘मर्दाना’ और प्रताप की ओर से ‘लूणा’ व ‘रामप्रसाद’ नामक हाथियों ने भाग लिया था। अकबर ने बाद में रामप्रसाद हाथी का नाम बदलकर ‘पीरप्रसाद’ कर दिया था।
- मारवाड़ के शासक मालदेव और बीकानेर के कल्याणमल ने खानवा के युद्ध में राणा सांगा की सहायता की थी।
अभ्यास हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न (20 Important Questions / PYQs)
प्रश्न 1: राणा सांगा और बाबर के मध्य ‘खानवा का युद्ध’ किस तिथि को लड़ा गया था?
उत्तर: 17 मार्च 1527 को।
प्रश्न 2: खानवा के युद्ध में राणा सांगा के घायल होने पर राजमुकुट धारण कर युद्ध का नेतृत्व किसने किया था?
उत्तर: झाला अज्जा (काठियावाड़) ने।
प्रश्न 3: मेवाड़ के किस शासक को कर्नल जेम्स टॉड ने ‘सैनिक भग्नावशेष’ की उपाधि दी थी?
उत्तर: राणा सांगा को।
प्रश्न 4: पन्ना धाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर मेवाड़ के किस राजकुमार की जान बचाई थी?
उत्तर: उदयसिंह की।
प्रश्न 5: अकबर के चित्तौड़ आक्रमण (1567 ई.) के समय किले की रक्षा करते हुए कौन से दो वीर सेनापति वीरगति को प्राप्त हुए थे?
उत्तर: जयमल राठौड़ और फत्ता चुंडावत।
प्रश्न 6: महाराणा प्रताप का बचपन का नाम (भीलों में प्रचलित नाम) क्या था?
उत्तर: कीका (Kika)।
प्रश्न 7: महाराणा प्रताप का प्रथम (औपचारिक से पूर्व) राज्याभिषेक कहाँ हुआ था?
उत्तर: गोगुंदा में (28 फरवरी 1572)।
प्रश्न 8: अकबर ने महाराणा प्रताप को समझाने के लिए सबसे अंत (चौथे नंबर) में किस दूत को भेजा था?
उत्तर: टोडरमल को (ट्रिक: जमाभटो)।
प्रश्न 9: कर्नल जेम्स टॉड ने ‘मेवाड़ की थर्मोपल्ली’ किस युद्ध को कहा है?
उत्तर: हल्दीघाटी के युद्ध को (18 जून 1576)।
प्रश्न 10: हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना के ‘हरावल’ (अग्रिम दल) का नेतृत्व किसने किया था?
उत्तर: हाकिम खां सूरी ने।
प्रश्न 11: हल्दीघाटी युद्ध में प्रताप के घायल होने पर उनका स्थान किसने लिया था?
उत्तर: झाला बीदा (मन्ना) ने।
प्रश्न 12: कर्नल जेम्स टॉड ने किस युद्ध को ‘मेवाड़ का मैराथन’ (Marathon of Mewar) कहा था?
उत्तर: दिवेर का युद्ध (1582 ई.)।
प्रश्न 13: महाराणा प्रताप ने 1585 ई. में किसे अपनी आपातकालीन राजधानी बनाया था?
उत्तर: चावंड को।
प्रश्न 14: महाराणा प्रताप की 8 खंभों की छतरी कहाँ स्थित है?
उत्तर: बांडोली (उदयपुर) में।
प्रश्न 15: प्रथम मुगल-मेवाड़ संधि (1615 ई.) किन दो शासकों के मध्य हुई थी?
उत्तर: मुग़ल सम्राट जहांगीर और महाराणा अमरसिंह प्रथम के मध्य।
प्रश्न 16: ‘विजय कटकातु’ की उपाधि मेवाड़ के किस शासक ने धारण की थी?
उत्तर: महाराणा राजसिंह ने।
प्रश्न 17: किशनगढ़ की किस राजकुमारी से विवाह करने के कारण महाराणा राजसिंह और औरंगजेब के मध्य विवाद हुआ था?
उत्तर: चारुमती से।
प्रश्न 18: सिहाड़ (नाथद्वारा) में श्रीनाथजी के मंदिर का निर्माण किस मेवाड़ शासक ने करवाया था?
उत्तर: महाराणा राजसिंह ने।
प्रश्न 19: राणा सांगा का दाह संस्कार किस स्थान पर हुआ जहाँ उनकी छतरी बनी हुई है?
उत्तर: मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में।
प्रश्न 20: किस इतिहासकार ने हल्दीघाटी के युद्ध को ‘गोगुंदा का युद्ध’ कहा है?
उत्तर: अब्दुल कादिर बदायूंनी ने।
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