मेवाड़ का इतिहास – भाग 1: गुहिल राजवंश (बप्पा रावल से राणा कुंभा तक) | Rajasthan History Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

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परिचय

मेवाड़ के गुहिल राजवंश का इतिहास, बप्पा रावल से राणा कुंभा तक के प्रमुख शासक, युद्ध, उपलब्धियाँ एवं परीक्षा उपयोगी तथ्यों का विस्तृत अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police, VDO एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण Rajasthan History Notes।

राजस्थान के इतिहास में मेवाड़ (वर्तमान उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और सलूम्बर का क्षेत्र) का इतिहास सबसे गौरवशाली और संघर्षपूर्ण रहा है। मेवाड़ का ‘गुहिल राजवंश’ विश्व का सबसे लंबे समय तक एक ही स्थान पर शासन करने वाला राजवंश माना जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RSMSSB, REET, Police) में मेवाड़ के इतिहास से सर्वाधिक प्रश्न पूछे जाते हैं।

आज के इस पोस्ट में हम गुहिल वंश की स्थापना से लेकर स्थापत्य कला के जनक ‘महाराणा कुंभा’ तक के इतिहास का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

1. गुहिल वंश की स्थापना और प्रारंभिक शासक

मेवाड़ के शासक स्वयं को भगवान राम के पुत्र ‘कुश’ का वंशज और ‘सूर्यवंशी हिंदूआ सूरज’ मानते थे।

गुहिलादित्य (गुहिल):

  • 566 ई. के लगभग गुहिलादित्य ने मेवाड़ में गुहिल वंश की स्थापना की। इन्हें इस वंश का आदिपुरुष या मूलपुरुष कहा जाता है।
  • इन्होंने अपनी राजधानी ‘नागदा’ (उदयपुर) को बनाया था।

बप्पा रावल (कालभोज):

  • वास्तविक संस्थापक: बप्पा रावल को मेवाड़ के गुहिल वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। इनका मूल नाम ‘कालभोज’ था। ‘बप्पा रावल’ इनकी उपाधि थी।
  • हारित ऋषि का आशीर्वाद: ये पाशुपत (लकुलीश) सम्प्रदाय के हारित ऋषि की गाएं चराते थे। ऋषि के आशीर्वाद से ही इन्हें मेवाड़ का राज्य प्राप्त हुआ था।
  • चित्तौड़ पर अधिकार (734 ई.): इन्होंने मान मोरी (मौर्य शासक) को हराकर 734 ई. में चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया, लेकिन राजधानी नागदा को ही रखा।
  • एकलिंगजी का मंदिर: बप्पा रावल ने नागदा (कैलाशपुरी, उदयपुर) में मेवाड़ के कुलदेवता एकलिंग नाथ जी का मंदिर बनवाया। मेवाड़ के शासक स्वयं को एकलिंगजी का दीवान मानकर शासन करते थे।
  • स्वर्ण सिक्के: अजमेर से 115 ग्रेन का एक सोने का सिक्का मिला है, जो बप्पा रावल का माना जाता है। इन्होंने राजस्थान में सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाए।

अल्लट (आलू रावल):

  • इन्होंने नागदा के स्थान पर ‘आहड़’ को अपनी दूसरी राजधानी बनाया।
  • इन्होंने हूण राजकुमारी ‘हरिया देवी’ से विवाह किया, जो राजस्थान का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय विवाह (International Marriage) माना जाता है।
  • मेवाड़ में सर्वप्रथम नौकरशाही (Bureaucracy) का गठन अल्लट ने ही किया था।

जैत्रसिंह (1213 – 1253 ई.):

  • इतिहासकार डॉ. दशरथ शर्मा के अनुसार जैत्रसिंह का काल ‘मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णकाल’ था।
  • भूताला का युद्ध (1227 ई.): जैत्रसिंह और दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश के मध्य यह युद्ध हुआ जिसमें जैत्रसिंह विजयी रहे। इस युद्ध की जानकारी जयसिंह सूरी की पुस्तक ‘हम्मीर मद मर्दन’ से मिलती है।
  • इल्तुतमिश की भागती हुई सेना ने नागदा को नष्ट कर दिया, इसलिए जैत्रसिंह ने चित्तौड़गढ़ को अपनी नई राजधानी बनाया।

2. रावल रतन सिंह और चित्तौड़ का प्रथम साका (1303 ई.)

रावल रतन सिंह गुहिल वंश की ‘रावल शाखा’ के अंतिम शासक थे। इनका काल रानी पद्मिनी के जौहर और अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के लिए जाना जाता है।

  • अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण: 1303 ई. में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। इसके मुख्य कारण थे: चित्तौड़ का सामरिक और व्यापारिक महत्व, अलाउद्दीन की साम्राज्यवादी नीति, और रानी पद्मिनी की सुंदरता।
  • चित्तौड़ का प्रथम साका (26 अगस्त 1303):
    • केसरिया: रावल रतन सिंह और उनके वीर सेनापति गोरा और बादल के नेतृत्व में राजपूतों ने केसरिया किया और वीरगति को प्राप्त हुए।
    • जौहर: रानी पद्मिनी के नेतृत्व में 1600 महिलाओं ने अग्नि जौहर किया।
    • यह चित्तौड़ का पहला और राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा साका था।
  • खिज्राबाद: अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया और अपने पुत्र खिज्र खां को यहाँ का प्रशासक नियुक्त कर चित्तौड़ का नाम बदलकर ‘खिज्राबाद’ रख दिया।
  • ऐतिहासिक स्रोत: इस आक्रमण का आँखों देखा हाल अमीर खुसरो ने अपनी पुस्तक ‘खजाइन-उल-फुतूह’ (तारीख-ए-अलाई) में लिखा है। रानी पद्मिनी की कथा का विस्तृत वर्णन 1540 ई. में मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा रचित ग्रंथ ‘पद्मावत’ में मिलता है।

3. सिसौदिया वंश की शुरुआत: राणा हम्मीर (1326 – 1364 ई.)

  • गुहिल वंश की पुनर्स्थापना: सिसोदा ग्राम के जागीरदार हम्मीर ने 1326 ई. में मालदेव चौहान के पुत्र बनवीर (जैसा) को हराकर चित्तौड़ पर पुनः अधिकार कर लिया। सिसोदा ग्राम का होने के कारण अब इस वंश के शासक ‘सिसौदिया’ कहलाए और इन्होंने अपने नाम के आगे ‘रावल’ के स्थान पर ‘राणा / महाराणा’ लगाना शुरू किया।
  • उपाधियां:
    • मेवाड़ का उद्धारक (Savior of Mewar).
    • विषम घाटी पंचानन: (कुंभलगढ़ प्रशस्ति में) इसका अर्थ है विकट परिस्थितियों में शेर के समान।
    • वीर राजा (रसिक प्रिया की टीका में)।
  • सिंगोली का युद्ध: हम्मीर ने मोहम्मद बिन तुगलक की सेना को सिंगोली (बांसवाड़ा/नीमच) के युद्ध में पराजित किया था।

4. महाराणा लाखा और राणा मोकल

महाराणा लाखा (लक्ष सिंह):

  • इनके काल में जावर (उदयपुर) में चांदी की खान (Silver Mine) निकली, जिससे मेवाड़ की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत हुई।
  • एक बंजारे ने इनके समय में उदयपुर में पिछोला झील का निर्माण करवाया।
  • मेवाड़ का भीष्म पितामह: मारवाड़ के रणमल की बहन हंसाबाई का विवाह लाखा के साथ इस शर्त पर हुआ कि हंसाबाई का पुत्र ही मेवाड़ का अगला राजा बनेगा। तब लाखा के ज्येष्ठ पुत्र ‘राव चूंडा’ ने आजीवन ब्रह्मचारी रहने और राजगद्दी त्यागने की प्रतिज्ञा की। इसी कारण राव चूंडा को ‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’ कहा जाता है।

महाराणा मोकल:

  • यह लाखा और हंसाबाई का पुत्र था।
  • इन्होंने चित्तौड़ में स्थित त्रिभुवन नारायण शिव मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और उसका नाम ‘समिद्धेश्वर मंदिर’ (मोकल जी का मंदिर) रखा।
  • 1433 ई. में जिलवाड़ा नामक स्थान पर ‘चाचा और मेरा’ ने महपा पंवार के साथ मिलकर मोकल की हत्या कर दी।

5. महाराणा कुंभा (1433 – 1468 ई.)

महाराणा कुंभा का काल मेवाड़ के इतिहास का ‘स्वर्ण काल’ माना जाता है। ये एक महान विजेता होने के साथ-साथ विद्यानुरागी और महान निर्माता भी थे।

A. प्रमुख सैनिक अभियान और युद्ध

  • सारंगपुर का युद्ध (1437 ई.): यह युद्ध कुंभा और मालवा (मांडू) के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम के मध्य हुआ। मोकल के हत्यारों को शरण देने के कारण यह युद्ध हुआ। कुंभा ने महमूद खिलजी को हराकर 6 महीने बंदी बनाए रखा। इस मालवा विजय के उपलक्ष्य में कुंभा ने चित्तौड़ में ‘विजय स्तंभ’ (Victory Tower) का निर्माण करवाया।
  • चांपानेर की संधि (1456 ई.): कुंभा को हराने के लिए मालवा के महमूद खिलजी और गुजरात के कुतुबुद्दीन शाह के मध्य यह संधि हुई।
  • बदनोर का युद्ध (1457 ई.): कुंभा ने मालवा और गुजरात की संयुक्त सेना को बदनोर (भीलवाड़ा) के युद्ध में पराजित किया और इस विजय के उपलक्ष्य में बदनोर में ‘कुशाल माता के मंदिर’ का निर्माण करवाया।

B. कुंभा का स्थापत्य काल (Architecture)

  • कवि श्यामलदास के ग्रंथ ‘वीर विनोद’ के अनुसार मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण अकेले महाराणा कुंभा ने करवाया था। इसीलिए इन्हें ‘राजस्थान की स्थापत्य कला का जनक’ कहा जाता है।
  • कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमंद): इसका वास्तुकार (Architect) ‘मंडन’ था। इस दुर्ग का सबसे ऊँचा भाग ‘कटारगढ़’ कहलाता है, जो कुंभा का निजी आवास था। इसे ‘मेवाड़ की आँख’ भी कहते हैं।
  • विजय स्तंभ (Victory Tower): यह 9 मंजिला और 122 फीट ऊँचा है। इसे भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष और हिंदू देवी-देवताओं का अजायबघर कहा जाता है। इसके वास्तुकार जैता, नापा, और पोमा थे। यह राजस्थान पुलिस और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) का प्रतीक चिन्ह है।

C. साहित्य और उपाधियां

  • ग्रंथ: कुंभा स्वयं एक महान विद्वान और वीणा वादक थे। इन्होंने संगीत राज (5 भागों में), संगीत मीमांसा, सूड प्रबंध, और कामराज रतिसार नामक ग्रंथ लिखे। जयदेव के ‘गीत गोविंद’ पर ‘रसिक प्रिया’ नामक टीका भी लिखी।
  • प्रमुख उपाधियां:
    1. अभिनव भरताचार्य: संगीत कला में निपुण होने के कारण।
    2. हिंदू सुरत्राण: तत्कालीन मुस्लिम शासकों द्वारा दी गई उपाधि।
    3. हाल गुरु: पहाड़ी दुर्गों को जीतने के कारण।
    4. राणे रासो: विद्वानों का आश्रयदाता होने के कारण।
    5. दान गुरु, चाप गुरु, परम गुरु आदि।
  • कुंभा की मृत्यु: 1468 ई. में कुंभलगढ़ दुर्ग के कटारगढ़ (मामादेव कुंड के पास) में उनके ही पुत्र उदा (उदयकरण) ने राजसिंहासन के लिए उनकी हत्या कर दी। उदा को मेवाड़ का ‘पितृहंता’ (पिता की हत्या करने वाला) कहा जाता है।

परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)

  • रावल रतन सिंह के दरबार में राघव चेतन नामक एक तांत्रिक था, जिसने अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मिनी की सुंदरता के बारे में बताया था।
  • राजपूत काल में ‘साका’ (Saka) केसरिया और जौहर दोनों के पूर्ण होने पर कहलाता है। यदि केवल केसरिया हो और जौहर न हो तो वह ‘अर्द्ध साका’ कहलाता है।
  • मेवाड़ के महाराणाओं का राज्याभिषेक उंदरी गाँव (भील जनजाति) के भील गमेती द्वारा अपने अंगूठे के रक्त से किया जाता था।
  • कुंभा का प्रमुख शिल्पी (वास्तुकार) मंडन था, जिसने राजवल्लभ, रूप मंडन, देवमूर्ति प्रकरण आदि ग्रंथों की रचना की।

अभ्यास हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न (20 Important Questions / PYQs)

प्रश्न 1: मेवाड़ के गुहिल वंश का वास्तविक संस्थापक किसे माना जाता है?

उत्तर: बप्पा रावल (कालभोज) को।

प्रश्न 2: बप्पा रावल को मेवाड़ का राज्य किस ऋषि के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ था?

उत्तर: हारित ऋषि के आशीर्वाद से।

प्रश्न 3: मेवाड़ में सर्वप्रथम नौकरशाही (Bureaucracy) का गठन किस शासक ने किया था?

उत्तर: अल्लट (आलू रावल) ने।

प्रश्न 4: भूताला का युद्ध (1227 ई.) किनके मध्य लड़ा गया था?

उत्तर: जैत्रसिंह और दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश के मध्य।

प्रश्न 5: चित्तौड़ का प्रथम साका और रानी पद्मिनी का जौहर किस वर्ष हुआ था?

उत्तर: 1303 ई. में (अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय)।

प्रश्न 6: अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ विजय के बाद उसका नाम बदलकर क्या रख दिया था?

उत्तर: खिज्राबाद।

प्रश्न 7: मेवाड़ का ‘उद्धारक’ और ‘विषम घाटी पंचानन’ किस महाराणा को कहा जाता है?

उत्तर: राणा हम्मीर को।

प्रश्न 8: मेवाड़ का वह कौन सा शासक था जिसके काल में जावर (उदयपुर) में चांदी की खान निकली थी?

उत्तर: महाराणा लाखा (लक्ष सिंह)।

प्रश्न 9: ‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’ किसे कहा जाता है?

उत्तर: राव चूंडा को (आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा के कारण)।

प्रश्न 10: कुंभा ने मालवा विजय (सारंगपुर का युद्ध 1437) के उपलक्ष्य में किस इमारत का निर्माण करवाया था?

उत्तर: विजय स्तंभ (चित्तौड़गढ़) का।

प्रश्न 11: चांपानेर की संधि (1456 ई.) किन दो राज्यों के सुल्तानों के मध्य कुंभा के विरुद्ध हुई थी?

उत्तर: मालवा (महमूद खिलजी) और गुजरात (कुतुबुद्दीन शाह) के मध्य।

प्रश्न 12: राजस्थान की स्थापत्य कला का जनक (Father of Architecture) किसे कहा जाता है?

उत्तर: महाराणा कुंभा को।

प्रश्न 13: कुंभलगढ़ दुर्ग का मुख्य वास्तुकार (शिल्पी) कौन था?

उत्तर: मंडन।

प्रश्न 14: संगीत कला में निपुण होने के कारण महाराणा कुंभा को कौन सी उपाधि दी गई थी?

उत्तर: अभिनव भरताचार्य।

प्रश्न 15: चित्तौड़ के प्रथम साके में किन दो वीर सेनापतियों ने अपना बलिदान दिया था?

उत्तर: गोरा और बादल ने।

प्रश्न 16: ‘संगीत राज’, ‘संगीत मीमांसा’ और ‘सूड प्रबंध’ ग्रंथों की रचना किसने की थी?

उत्तर: महाराणा कुंभा ने।

प्रश्न 17: ‘हम्मीर मद मर्दन’ नामक ऐतिहासिक ग्रंथ के रचयिता कौन हैं?

उत्तर: जयसिंह सूरी।

प्रश्न 18: कुंभलगढ़ दुर्ग का वह सबसे ऊँचा भाग कौन सा है जिसे ‘मेवाड़ की आँख’ कहा जाता है?

उत्तर: कटारगढ़ (कुंभा का निजी आवास)।

प्रश्न 19: महाराणा कुंभा की हत्या 1468 ई. में किसने की थी?

उत्तर: उनके पुत्र उदा (उदयकरण) ने।

प्रश्न 20: बप्पा रावल द्वारा निर्मित मेवाड़ के कुलदेवता का मंदिर कौन सा है और वह कहाँ स्थित है?

उत्तर: एकलिंग नाथ जी का मंदिर (कैलाशपुरी, नागदा, उदयपुर में)।

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