
परिचय
राजस्थान के प्रमुख किसान आंदोलनों—बिजौलिया, बेगूं एवं शेखावाटी किसान आंदोलन—का इतिहास, कारण, प्रमुख नेता, घटनाएँ एवं परिणाम का विस्तृत अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police, VDO एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी Rajasthan History Notes।
अंग्रेजी हुकूमत और रियासती शासकों के दोहरे नियंत्रण ने राजस्थान के किसानों की कमर तोड़ दी थी। जागीरदारों द्वारा किसानों से अत्यधिक लगान, 84 प्रकार के ‘लाग-बाग’ (टैक्स) और ‘बेगार’ (बिना वेतन के काम करवाना) ली जाती थी। इसके विरोध में राजस्थान में कई ऐतिहासिक किसान आंदोलन हुए। प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RSMSSB, REET) में बिजौलिया के 44 वर्ष लंबे आंदोलन, बेगूं के बोल्शेविक समझौते और नीमूचाणा हत्याकांड से हर बार प्रश्न पूछे जाते हैं।
आज के इस पोस्ट में हम राजस्थान के प्रमुख किसान आंदोलनों, उनके कारणों, नेतृत्वकर्ताओं और ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. बिजौलिया किसान आंदोलन (Bijolia Peasant Movement)
यह राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत का प्रथम, सबसे लंबा और पूर्णतः अहिंसक किसान आंदोलन था। यह आंदोलन 1897 ई. से शुरू होकर 1941 ई. तक (कुल 44 वर्षों तक) चला।
- स्थिति: बिजौलिया वर्तमान भीलवाड़ा जिले में स्थित है। यह मेवाड़ रियासत का एक ‘ए’ श्रेणी (प्रथम श्रेणी) का ठिकाना था। इसे प्राचीन काल में ‘ऊपरमाल’ कहा जाता था।
- किसानों की जाति: यहाँ मुख्य रूप से धाकड़ (Dhakad) जाति के किसान निवास करते थे।
- आंदोलन के मुख्य कारण: 84 प्रकार की लाग-बाग (Taxes), अत्यधिक भू-राजस्व और ‘लाटा-कुंता’ प्रथा (खड़ी फसल का अनुमान लगाकर टैक्स तय करना)।
आंदोलन के तीन प्रमुख चरण (Three Phases of Movement)
प्रथम चरण (1897 – 1915 ई.): स्थानीय नेतृत्व
- शुरुआत: 1897 में गिरधारीपुरा गाँव में गंगाराम धाकड़ के मृत्युभोज पर किसान एकत्रित हुए और महाराणा फतहसिंह से जागीरदार की शिकायत करने का निर्णय लिया। शिकायत के लिए नानजी और ठाकरी पटेल को उदयपुर भेजा गया।
- चंवरी कर (Chawari Tax – 1903): बिजौलिया के जागीरदार राव कृष्णसिंह ने किसानों पर ‘चंवरी कर’ लगा दिया (लड़की की शादी पर 5 रुपये का टैक्स)। इसके विरोध में किसानों ने 2 साल तक अपनी बेटियों की शादी नहीं की और खेत खाली छोड़ दिए।
- तलवार बंधाई कर (Talwar Bandhai Tax – 1906): नए जागीरदार राव पृथ्वीसिंह ने जनता पर ‘तलवार बंधाई’ (उत्तराधिकार शुल्क) लगा दिया।
- नेतृत्व: इस चरण का नेतृत्व साधु सीताराम दास, फतहकरण चारण और ब्रह्मदेव ने किया।
द्वितीय चरण (1915 – 1923 ई.): राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
- यह आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चरण था। 1916 में विजय सिंह पथिक (Vijay Singh Pathik) इस आंदोलन से जुड़े। (पथिक जी का मूल नाम ‘भूप सिंह’ था और वे बुलंदशहर, यूपी के निवासी थे)।
- ऊपरमाल पंच बोर्ड की स्थापना: 1917 ई. (हरियाली अमावस्या के दिन) पथिक जी ने ‘ऊपरमाल पंच बोर्ड’ की स्थापना की और मन्ना पटेल को इसका सरपंच बनाया।
- प्रताप समाचार पत्र: विजय सिंह पथिक ने कानपुर से गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा प्रकाशित ‘प्रताप’ नामक समाचार पत्र के माध्यम से बिजौलिया आंदोलन को पूरे भारत में चर्चित कर दिया।
- पंछीड़ा गीत: इसी समय माणिक्य लाल वर्मा ने किसानों में जोश भरने के लिए ‘पंछीड़ा’ (Panchida) नामक प्रसिद्ध गीत गाया। प्रेमचंद ने अपने उपन्यास ‘रंगभूमि’ में भी इस आंदोलन की झलक दी है।
तृतीय चरण (1923 – 1941 ई.): समाधान का चरण
- इस चरण का नेतृत्व रामनारायण चौधरी, हरिभाऊ उपाध्याय और जमनालाल बजाज ने किया।
- समाप्ति: 1941 ई. में मेवाड़ के प्रधानमंत्री सर टी. विजयराघवाचार्य और राजस्व मंत्री डॉ. मोहन सिंह मेहता के प्रयासों से किसानों की मांगें मान ली गईं और 44 वर्षों बाद यह ऐतिहासिक आंदोलन सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।
2. बेगूं किसान आंदोलन (Bengu Peasant Movement)
बिजौलिया से प्रेरित होकर 1921 ई. में मेवाड़ के ही दूसरे ठिकाने ‘बेगूं’ (वर्तमान चित्तौड़गढ़) में धाकड़ जाति के किसानों ने आंदोलन शुरू किया।
- शुरुआत: 1921 में मेनाल के भैंरूकुंड नामक स्थान से।
- नेतृत्व: किसानों के आग्रह पर विजय सिंह पथिक के निर्देशानुसार रामनारायण चौधरी ने इसका नेतृत्व किया।
- बोल्शेविक समझौता (Bolshevik Agreement): बेगूं के ठाकुर अनूप सिंह और राजस्थान सेवा संघ (किसानों) के मध्य एक समझौता हुआ। लेकिन मेवाड़ सरकार (रेजीडेंट ट्रेंच) ने इसे मानने से इंकार कर दिया और इसे ‘बोल्शेविक समझौते’ की संज्ञा दी। अनूप सिंह को उदयपुर में नजरबंद कर दिया गया।
- ट्रेंच आयोग: बेगूं में किसानों की समस्याओं की जांच के लिए अंग्रेज अधिकारी ‘ट्रेंच’ (Trench) के नेतृत्व में एक आयोग भेजा गया।
- गोविंदपुरा हत्याकांड (13 जुलाई 1923): ट्रेंच के आदेश पर गोविंदपुरा गाँव में सभा कर रहे किसानों पर गोलियां चलाई गईं। इस हत्याकांड में रूपाजी और कृपाजी धाकड़ (Rupa Ji and Kripa Ji) नामक दो किसान शहीद हो गए। बाद में पथिक जी के हस्तक्षेप से यह आंदोलन समाप्त हुआ।
3. शेखावाटी / सीकर किसान आंदोलन
शेखावाटी (सीकर, झुंझुनूं, चूरू) क्षेत्र में मुख्य रूप से जाट किसानों द्वारा जागीरदारों के अत्याचारों के विरुद्ध यह आंदोलन किया गया।
- पंचपाने (Panchpane): शेखावाटी की 5 प्रमुख जागीरें – बिसाऊ, ढूंड़लोद, मलसीसर, मंडावा और नवलगढ़।
- नेतृत्वकर्ता: सरदार हरलाल सिंह, रामनारायण चौधरी, नरोत्तम लाल जोशी और मास्टर प्यारेलाल।
- कटराथल महिला सम्मेलन (25 अप्रैल 1934): सीकर के सिहोट के ठाकुर द्वारा महिलाओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में ‘कटराथल’ नामक स्थान पर किशोरी देवी (Kishori Devi) के नेतृत्व में 10,000 से अधिक जाट महिलाओं ने एक विशाल सम्मेलन किया। यह राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा महिला सम्मेलन था। इसमें मुख्य वक्ता उत्तमा देवी थीं।
- कूदन हत्याकांड (1935): सीकर के कूदन गाँव में कर न देने पर जागीरदार की पुलिस ने किसानों पर गोलियां चलाईं जिसमें कई किसान मारे गए। इस जघन्य हत्याकांड की गूंज ब्रिटेन की संसद ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ (House of Commons) में गूंजी थी। लंदन के ‘डेली हेराल्ड’ अखबार ने इस पर लेख छापे थे।
4. अन्य महत्वपूर्ण किसान आंदोलन
A. अलवर किसान आंदोलन और नीमूचाणा हत्याकांड (1925)
- कारण: अलवर रियासत में जंगली सूअरों (Wild Boars) को मारने पर पाबंदी थी, जो किसानों की फसलें बर्बाद कर देते थे। इसके अलावा लगान की दरों में वृद्धि कर दी गई थी।
- नीमूचाणा हत्याकांड (14 मई 1925): अलवर के नीमूचाणा गाँव में किसान एक शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे। अलवर के महाराजा जयसिंह के आदेश पर पुलिस कमांडर छज्जू सिंह ने अंधाधुंध फायरिंग करवा दी, जिसमें सैकड़ों किसान मारे गए।
- महात्मा गांधी का कथन: महात्मा गांधी ने अपने समाचार पत्र ‘यंग इंडिया’ में इस हत्याकांड को जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी अधिक वीभत्स बताया और इसे ‘दोहरी डायरशाही’ (Dyerism Double Distilled) की संज्ञा दी। रामनारायण चौधरी ने इसे ‘नीमूचाणा हत्याकांड’ नाम दिया।
B. बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन (1922)
- नेतृत्व: राजस्थान सेवा संघ के कार्यकर्ता नैनूराम शर्मा (Nayanuram Sharma) ने।
- डाबी हत्याकांड (2 अप्रैल 1923): बूंदी के डाबी गाँव में किसानों की सभा पर पुलिस अधिकारी इकराम हुसैन ने गोलियां चलवा दीं। इसमें नानक जी भील (Nanak Ji Bhil) और देवीलाल गुर्जर शहीद हो गए।
- विशेष: नानक जी भील गोली लगने के समय ‘झंडा गीत’ (Jhanda Song) गा रहे थे। माणिक्य लाल वर्मा ने इनकी याद में ‘अर्जी’ (Arzi) नामक कविता लिखी थी।
C. दूधवा खारा किसान आंदोलन
- स्थिति: बीकानेर रियासत (वर्तमान चूरू जिला)।
- नेतृत्व: बीकानेर के जागीरदार सूरजमल सिंह के अत्याचारों के विरुद्ध हनुमान सिंह और मघाराम वैद्य ने इसका नेतृत्व किया। महिलाओं का नेतृत्व हनुमान सिंह की पत्नी खेतूबाई ने किया था।
परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- बिजौलिया आंदोलन के दौरान विजय सिंह पथिक को ‘टॉडगढ़ जेल’ (अजमेर) में बंदी बनाकर रखा गया था, जहाँ से वे भाग निकले थे।
- मारवाड़ किसान आंदोलन के दौरान डाबड़ा कांड (13 मार्च 1947) हुआ था। डीडवाना के डाबड़ा गाँव में मथुरादास माथुर के नेतृत्व में सभा हो रही थी, जहाँ जमींदारों ने हमला कर चुन्नीलाल और रूघाराम आदि किसानों की हत्या कर दी।
- तोल आंदोलन (मारवाड़): चाँदमाल सुराणा के नेतृत्व में 100 तोले के सेर के स्थान पर 80 तोले का सेर करने के विरोध में हुआ।
अभ्यास हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न (20 Important Questions / PYQs)
प्रश्न 1: भारत का प्रथम और सबसे लंबा (44 वर्ष) चलने वाला अहिंसक किसान आंदोलन कौन सा था?
उत्तर: बिजौलिया किसान आंदोलन।
प्रश्न 2: बिजौलिया किसान आंदोलन में मुख्य रूप से किस जाति के किसानों ने भाग लिया था?
उत्तर: धाकड़ जाति के किसानों ने।
प्रश्न 3: 1903 ई. में बिजौलिया के जागीरदार राव कृष्णसिंह ने किसानों पर कौन सा नया कर लगाया था?
उत्तर: चंवरी कर (लड़की की शादी पर 5 रुपये का कर)।
प्रश्न 4: ‘तलवार बंधाई’ कर (उत्तराधिकार शुल्क) किस जागीरदार द्वारा लगाया गया था?
उत्तर: राव पृथ्वीसिंह द्वारा (1906 ई. में)।
प्रश्न 5: विजय सिंह पथिक का मूल नाम क्या था?
उत्तर: भूप सिंह।
प्रश्न 6: 1917 ई. में ‘ऊपरमाल पंच बोर्ड’ की स्थापना किसके द्वारा की गई थी?
उत्तर: विजय सिंह पथिक द्वारा।
प्रश्न 7: बिजौलिया किसान आंदोलन को पूरे भारत में किस समाचार पत्र के माध्यम से चर्चित किया गया?
उत्तर: ‘प्रताप’ समाचार पत्र (गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा कानपुर से प्रकाशित)।
प्रश्न 8: किसानों में जोश भरने के लिए ‘पंछीड़ा’ नामक प्रसिद्ध गीत किसने लिखा और गाया था?
उत्तर: माणिक्य लाल वर्मा ने।
प्रश्न 9: बेगूं किसान आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से किसके द्वारा किया गया?
उत्तर: रामनारायण चौधरी द्वारा।
प्रश्न 10: ‘बोल्शेविक समझौते’ का संबंध राजस्थान के किस किसान आंदोलन से है?
उत्तर: बेगूं किसान आंदोलन से।
प्रश्न 11: गोविंदपुरा हत्याकांड (1923) में कौन से दो किसान नेता शहीद हो गए थे?
उत्तर: रूपाजी और कृपाजी धाकड़।
प्रश्न 12: किसानों की समस्याओं की जांच के लिए ‘ट्रेंच आयोग’ (Trench Commission) का गठन किस आंदोलन के दौरान किया गया?
उत्तर: बेगूं किसान आंदोलन।
प्रश्न 13: 1934 ई. में शेखावाटी के ‘कटराथल’ नामक स्थान पर 10,000 जाट महिलाओं के सम्मेलन का नेतृत्व किसने किया था?
उत्तर: किशोरी देवी ने।
प्रश्न 14: सीकर के किस गाँव के हत्याकांड की गूंज ब्रिटेन के ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ (House of Commons) में सुनाई दी थी?
उत्तर: कूदन हत्याकांड (1935) की।
प्रश्न 15: 14 मई 1925 को घटित ‘नीमूचाणा हत्याकांड’ किस रियासत से संबंधित था?
उत्तर: अलवर रियासत से।
प्रश्न 16: महात्मा गांधी ने किस हत्याकांड को ‘दोहरी डायरशाही’ (Dyerism Double Distilled) कहा था?
उत्तर: नीमूचाणा हत्याकांड को।
प्रश्न 17: जंगली सूअरों (Wild Boars) की समस्या को लेकर राजस्थान में कौन सा किसान आंदोलन शुरू हुआ था?
उत्तर: अलवर किसान आंदोलन।
प्रश्न 18: बूंदी के ‘डाबी हत्याकांड’ (1923) में झंडा गीत गाते हुए कौन से किसान नेता शहीद हो गए थे?
उत्तर: नानक जी भील।
प्रश्न 19: नानक जी भील की याद में ‘अर्जी’ (Arzi) नामक कविता किसने लिखी थी?
उत्तर: माणिक्य लाल वर्मा ने।
प्रश्न 20: ‘दूधवा खारा’ किसान आंदोलन का संबंध राजस्थान की किस रियासत से था और इसका नेतृत्व किसने किया?
उत्तर: बीकानेर रियासत (वर्तमान चूरू क्षेत्र), नेतृत्व: हनुमान सिंह ने।
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