
परिचय
अजमेर एवं रणथंभौर के चौहान वंश का इतिहास, पृथ्वीराज चौहान III, हम्मीर देव, तराइन के युद्ध, रणथंभौर दुर्ग एवं महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तृत अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police, VDO एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी Rajasthan History Notes।
राजपूत काल में ‘चौहान वंश’ (Chauhan Dynasty) का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। चौहानों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए विदेशी आक्रांताओं (महमूद गजनवी से लेकर मुहम्मद गौरी और अलाउद्दीन खिलजी तक) से कड़ा संघर्ष किया। प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RSMSSB, REET, Patwari) में पृथ्वीराज चौहान के तराइन के युद्धों, विग्रहराज चतुर्थ की सांस्कृतिक उपलब्धियों और हम्मीर देव चौहान के हठ व रणथंभौर के साके से हमेशा प्रश्न पूछे जाते हैं।
आज के इस पोस्ट में हम अजमेर के शाकम्भरी चौहानों और रणथंभौर के चौहान वंश का सम्पूर्ण अध्ययन करेंगे।
1. चौहान वंश की उत्पत्ति (Origin of Chauhans)
चौहानों की उत्पत्ति के विषय में इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं:
- अग्निकुंड का सिद्धांत: चंद्रबरदाई के ग्रंथ ‘पृथ्वीराज रासो’ और सूर्यमल्ल मिश्रण के अनुसार, चौहानों की उत्पत्ति महर्षि वशिष्ठ द्वारा आबू पर्वत पर किए गए अग्निकुंड से हुई (प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान)।
- ब्राह्मण वंशीय सिद्धांत: बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) के अनुसार चौहान ‘वत्स गोत्र के ब्राह्मण’ थे। दशरथ शर्मा ने भी अपनी पुस्तक ‘द अर्ली चौहान डायनेस्टीज’ में इसका समर्थन किया है।
- सूर्यवंशी सिद्धांत: ‘पृथ्वीराज विजय’ (जयानक द्वारा रचित) और ‘हम्मीर महाकाव्य’ में इन्हें सूर्यवंशी बताया गया है।
2. शाकम्भरी (सांभर) और अजमेर के चौहान
वासुदेव चौहान (Vasudev Chauhan):
- संस्थापक: वासुदेव चौहान ने 551 ई. के लगभग सांभर (शाकम्भरी) क्षेत्र में चौहान वंश की स्थापना की। इन्हें चौहानों का ‘आदिपुरुष’ या ‘मूलपुरुष’ कहा जाता है।
- सांभर झील का निर्माण: बिजौलिया शिलालेख के अनुसार वासुदेव ने ही खारे पानी की सांभर झील का निर्माण करवाया था। इनकी प्रारंभिक राजधानी ‘अहिछत्रपुर’ (वर्तमान नागौर) थी।
अजयराज (Ajayaraj – 1105 से 1133 ई.):
- अजमेर की स्थापना: अजयराज ने 1113 ई. में अजमेर (अजयमेरु) नगर बसाया और इसे चौहानों की नई राजधानी बनाया।
- तारागढ़ दुर्ग: इन्होंने अजमेर में ‘बीठली पहाड़ी’ पर ‘अजयमेरु दुर्ग’ का निर्माण करवाया, जिसे बाद में तारागढ़ या ‘गठबीठली’ कहा गया।
- सिक्के: इन्होंने चांदी और तांबे के सिक्के चलाए जिन पर ‘श्री अजयदेव’ और अपनी रानी ‘सोमलदेखा’ (सोमलवती) का नाम अंकित करवाया।
अर्णोराज / आनाजी (Arnoraj – 1133 से 1155 ई.):
- आनासागर झील: तुर्कों के आक्रमण से खून से रंगी धरती को साफ करने के लिए अर्णोराज ने अजमेर में चंद्रा नदी के पानी को रोककर आनासागर झील का निर्माण करवाया (1137 ई.)।
- पुष्कर में मंदिर: इन्होंने पुष्कर में प्रसिद्ध ‘वराह मंदिर’ का निर्माण करवाया।
- इनकी हत्या इनके ही पुत्र जगदेव ने कर दी थी (जगदेव को चौहानों का पितृहंता कहा जाता है)।
विग्रहराज चतुर्थ / बीसलदेव (Vigraharaj IV – 1153 से 1163 ई.):
- स्वर्णकाल (Golden Era): विग्रहराज चतुर्थ का काल सपादलक्ष (चौहानों के राज्य) का ‘स्वर्णकाल’ कहलाता है। विद्वानों का आश्रयदाता होने के कारण इन्हें ‘कवि बांधव’ (Kavi Bandhav) या ‘कटिबंधु’ कहा जाता था।
- हरिकेली नाटक (Hari Keli Natak): ये स्वयं एक महान विद्वान थे और इन्होंने संस्कृत भाषा में ‘हरिकेली’ नामक नाटक लिखा (जिसकी पंक्तियां आज भी ढाई दिन के झोपड़े और राजाराम मोहन राय के स्मारक पर इंग्लैंड में खुदी हैं)।
- संस्कृत पाठशाला: इन्होंने अजमेर में ‘सरस्वती कंठाभरण’ नामक एक संस्कृत पाठशाला बनवाई, जिसे बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने तुड़वाकर ‘ढाई दिन का झोपड़ा’ (मस्जिद) बना दिया। (यह राजस्थान की प्रथम मस्जिद मानी जाती है)।
- बीसलपुर बांध: इन्होंने टोंक में बीसलपुर नगर बसाया और बीसलपुर झील का निर्माण करवाया।
- दरबारी कवि: इनके दरबार में ‘सोमदेव’ थे, जिन्होंने ‘ललित विग्रहराज’ नामक ग्रंथ लिखा।
3. पृथ्वीराज चौहान तृतीय (Prithviraj Chauhan III: 1177 – 1192 ई.)
ये अजमेर के सबसे प्रतापी और अंतिम महान हिंदू सम्राट थे। 11 वर्ष की अल्पायु में ये शासक बने। इनकी माता कर्पूरी देवी ने प्रारंभिक दिनों में संरक्षिका के रूप में कार्य किया।
- प्रमुख उपाधियां:
- राय पिथौरा (Rai Pithora): युद्ध में पीठ न दिखाने और दिल्ली में पिथौरागढ़ किला बनवाने के कारण।
- दल पुंगल (Dal Pungal): इसका अर्थ है ‘विश्व विजेता’।
पृथ्वीराज चौहान के प्रमुख युद्ध और विजय
- महोबा का युद्ध (1182 ई.): पृथ्वीराज ने चंदेल शासक परमर्दिदेव को पराजित किया। इस युद्ध में परमर्दिदेव के दो महान सेनापति आल्हा और ऊदल (Aalha and Udal) वीरगति को प्राप्त हुए।
- तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): यह युद्ध हरियाणा के करनाल (तराइन के मैदान) में पृथ्वीराज चौहान और अफगान आक्रांता मुहम्मद गौरी (Muhammad Ghori) के मध्य हुआ। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की शानदार विजय हुई और गौरी को घायल अवस्था में मैदान से भागना पड़ा। दिल्ली के गवर्नर गोविंदराज ने गौरी को भाला मारा था।
- तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.):
- एक वर्ष बाद गौरी पूरी तैयारी के साथ वापस आया।
- पृथ्वीराज चौहान इस युद्ध में पराजित हुए और उन्हें सिरसा (हरियाणा) के पास बंदी बना लिया गया।
- इस युद्ध को भारत के इतिहास का ‘निर्णायक युद्ध’ माना जाता है क्योंकि इसके बाद भारत में मुस्लिम सत्ता (तुर्क राज) की स्थायी स्थापना हो गई।
दरबारी विद्वान और साहित्य
- चंदबरदाई: ये पृथ्वीराज के बचपन के मित्र और राजकवि थे। इन्होंने ‘पृथ्वीराज रासो’ नामक महाकाव्य हिंदी भाषा (पिंगल-डिंगल) में लिखा। इसी ग्रंथ में शब्दभेदी बाण (चार बांस, चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण…) का उल्लेख है।
- जयानक: कश्मीर के विद्वान, जिन्होंने संस्कृत में ‘पृथ्वीराज विजय’ लिखा।
4. रणथंभौर के चौहान और हम्मीर देव (1282 – 1301 ई.)
पृथ्वीराज चौहान तृतीय की मृत्यु के बाद उनके पुत्र गोविंदराज ने 1194 ई. में रणथंभौर में चौहान वंश की नई शाखा की स्थापना की। रणथंभौर के चौहानों में सबसे प्रतापी शासक हम्मीर देव चौहान हुए।
हम्मीर देव चौहान (Hammir Dev Chauhan)
- हठ के लिए प्रसिद्ध: हम्मीर देव अपनी शरण में आए व्यक्ति की रक्षा और अपने हठ (Stubbornness) के लिए इतिहास में प्रसिद्ध हैं। उनके लिए यह दोहा कहा जाता है:“सिंह सवन, सत्पुरुष वचन, कदली फलत इक बार। तिय तेल, हम्मीर हठ, चढ़े न दूजी बार॥”
- अलाउद्दीन खिलजी से शत्रुता का कारण: अलाउद्दीन खिलजी के मंगोल विद्रोही सेनापति ‘मुहम्मद शाह’ और ‘केहब्रू’ को हम्मीर देव ने अपने यहाँ शरण दी थी और खिलजी के मांगने पर भी लौटाने से इंकार कर दिया। (कुछ इतिहासकारों के अनुसार मुहम्मद शाह का खिलजी की मराठा बेगम चिमना से प्रेम प्रसंग भी था)।
रणथंभौर का साका (1301 ई.) – राजस्थान का प्रथम साका
- खिलजी का आक्रमण: 1301 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने स्वयं रणथंभौर दुर्ग पर घेरा डाला।
- विश्वासघात: हम्मीर के दो सेनापतियों ‘रणमल और रतिपाल’ ने दुर्ग का गुप्त रास्ता खिलजी को बताकर अपनी ही मातृभूमि से गद्दारी की।
- केसरिया: 11 जुलाई 1301 को हम्मीर देव चौहान के नेतृत्व में राजपूतों ने केसरिया किया और वीरगति प्राप्त की।
- जौहर: हम्मीर की रानी रंगादेवी (Ranga Devi) के नेतृत्व में महिलाओं ने जौहर किया।
- जल जौहर (Jal Jauhar): हम्मीर देव की पुत्री देवलदे (पदमला) ने दुर्ग में स्थित पदमला तालाब में कूदकर अपने प्राण त्यागे। यह राजस्थान के इतिहास का एकमात्र ‘जल जौहर’ माना जाता है।
- परिणाम: यह रणथंभौर का पतन और राजस्थान का प्रथम साका था। विजय के बाद अमीर खुसरो ने कहा था: “आज कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया।”
परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- पृथ्वीराज चौहान तृतीय के घोड़े का नाम ‘नाट्यरंभा’ था।
- ‘ढाई दिन का झोपड़ा’ वास्तव में एक संस्कृत पाठशाला थी जिसे विग्रहराज चतुर्थ ने बनवाया था। यहाँ आज भी पंजाब शाह पीर का ढाई दिन का उर्स (मेला) लगता है।
- हम्मीर देव चौहान ने अपने जीवन में 17 युद्ध लड़े, जिनमें से 16 में वे विजयी रहे।
- हम्मीर के गुरु का नाम ‘राघव देव’ और दरबारी कवि ‘बीजादित्य’ थे। नयनचंद्र सूरी ने ‘हम्मीर महाकाव्य’ और जोधराज ने ‘हम्मीर रासो’ की रचना की।
अभ्यास हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न (20 Important Questions / PYQs)
प्रश्न 1: बिजौलिया शिलालेख के अनुसार सांभर झील का निर्माता और चौहान वंश का संस्थापक कौन था?
उत्तर: वासुदेव चौहान (551 ई.)।
प्रश्न 2: अजमेर (अजयमेरु) नगर की स्थापना 1113 ई. में किस शासक ने की थी?
उत्तर: अजयराज ने।
प्रश्न 3: तुर्कों के रक्त से रंगी धरती को धोने के लिए अजमेर में आनासागर झील का निर्माण किसने करवाया था?
उत्तर: अर्णोराज (आनाजी) ने।
प्रश्न 4: चौहानों का वह कौन सा शासक था जिसके काल को ‘सपादलक्ष का स्वर्णकाल’ कहा जाता है?
उत्तर: विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव)।
प्रश्न 5: विग्रहराज चतुर्थ ने किस प्रसिद्ध संस्कृत नाटक की रचना की थी?
उत्तर: हरिकेली नाटक की।
प्रश्न 6: अजमेर स्थित ‘ढाई दिन का झोपड़ा’ मूल रूप से क्या था और इसका निर्माण किसने करवाया था?
उत्तर: यह एक संस्कृत पाठशाला (सरस्वती कंठाभरण) थी, जिसका निर्माण विग्रहराज चतुर्थ ने करवाया था।
प्रश्न 7: पृथ्वीराज चौहान तृतीय को किस उपाधि से जाना जाता है?
उत्तर: राय पिथौरा और दल पुंगल।
प्रश्न 8: ‘पृथ्वीराज रासो’ महाकाव्य के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: चंदबरदाई।
प्रश्न 9: 1182 ई. के महोबा युद्ध में पृथ्वीराज चौहान के विरुद्ध लड़ते हुए कौन से दो वीर सेनापति वीरगति को प्राप्त हुए थे?
उत्तर: आल्हा और ऊदल।
प्रश्न 10: तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.) किनके मध्य लड़ा गया था और इसका परिणाम क्या रहा?
उत्तर: पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी के मध्य। इसमें पृथ्वीराज चौहान विजयी हुए।
प्रश्न 11: भारत के इतिहास में मुस्लिम सत्ता की स्थापना के लिए कौन सा युद्ध निर्णायक माना जाता है?
उत्तर: तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.)।
प्रश्न 12: ‘पृथ्वीराज विजय’ नामक संस्कृत ग्रंथ की रचना किसने की थी?
उत्तर: जयानक ने।
प्रश्न 13: रणथंभौर में चौहान वंश की स्थापना 1194 ई. में किसने की थी?
उत्तर: पृथ्वीराज चौहान के पुत्र गोविंदराज ने।
प्रश्न 14: अलाउद्दीन खिलजी के किस मंगोल विद्रोही सेनापति को हम्मीर देव चौहान ने शरण दी थी?
उत्तर: मुहम्मद शाह (और केहब्रू) को।
प्रश्न 15: राजस्थान का प्रथम साका (1301 ई.) किस दुर्ग में और किसके आक्रमण के समय हुआ?
उत्तर: रणथंभौर दुर्ग में, अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय।
प्रश्न 16: रणथंभौर के युद्ध में हम्मीर देव चौहान के किन दो सेनापतियों ने उनके साथ विश्वासघात किया था?
उत्तर: रणमल और रतिपाल ने।
प्रश्न 17: राजस्थान के इतिहास का एकमात्र ‘जल जौहर’ किसने किया था?
उत्तर: हम्मीर देव की पुत्री देवलदे (पदमला) ने (पदमला तालाब में)।
प्रश्न 18: “आज कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया”, यह कथन रणथंभौर विजय के बाद किसने कहा था?
उत्तर: अमीर खुसरो ने।
प्रश्न 19: ‘तिय तेल, हम्मीर हठ, चढ़े न दूजी बार’, यह कहावत किस शासक के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: हम्मीर देव चौहान के लिए।
प्रश्न 20: ‘हम्मीर महाकाव्य’ की रचना किस विद्वान ने की थी?
उत्तर: नयनचंद्र सूरी ने।
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