राजस्थान का लोक संगीत, गायन शैलियाँ एवं प्रमुख वाद्य यंत्र | Rajasthan Art & Culture Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान का लोक संगीत गायन शैलियाँ एवं प्रमुख वाद्य यंत्र राजस्थान का लोक संगीत, गायन शैलियाँ एवं प्रमुख वाद्य यंत्र | Rajasthan Art & Culture Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान के लोक संगीत, प्रमुख गायन शैलियाँ, मांड, पनिहारी, लंगा-मांगणियार परंपरा एवं रावणहत्था, कमायचा, अलगोजा, भपंग, मोरचंग सहित प्रमुख वाद्य यंत्रों का विस्तृत अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police, VDO एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण Rajasthan Art & Culture Notes।

परिचय मरुस्थलीय और वीर भूमि होने के बावजूद राजस्थान का जीवन कभी नीरस नहीं रहा। यहाँ की लोक कलाओं, विशेषकर संगीत और वाद्य यंत्रों ने यहाँ की संस्कृति में प्राण फूंके हैं। यहाँ के संगीत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित करने का श्रेय लंगा, मांगणियार, ढोली, मिरासी और कालबेलिया जैसी जातियों को जाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RSMSSB, REET) में मांड गायकी, राजस्थान के राज्य गीत (केसरिया बालम), विभिन्न लोकगीतों के क्षेत्र (जैसे- कुरजां, मूमल) और वाद्य यंत्रों की श्रेणियों (तत, सुषिर, अवनद्ध, घन) से सबसे ज्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं। महारथ अकादमी के इस नोट्स में हम इन्हें बहुत ही सरल तरीके से समझेंगे।

1. राजस्थान की प्रमुख लोक गायन शैलियाँ (Folk Singing Styles)

A. मांड गायकी (Maand)

  • क्षेत्र: मुख्य रूप से जैसलमेर और बीकानेर क्षेत्र।
  • विशेषता: यह शृंगार रस प्रधान गायकी है, जिसे प्राचीन काल में राजदरबारों में गाया जाता था।
  • राज्य गीत: राजस्थान का राज्य गीत “केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देस” मांड गायकी में ही गाया जाता है।
  • प्रसिद्ध गायिकाएं:
    • अल्लाह जिलाई बाई (बीकानेर): इन्होंने ‘केसरिया बालम’ को विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। इन्हें ‘मरु कोकिला’ कहा जाता है। (इन्हें पद्मश्री भी मिल चुका है)।
    • गवरी बाई (पाली), मांगी बाई (उदयपुर) और बन्नो बेगम (जयपुर)।

B. मांगणियार गायकी (Manganiyar)

  • क्षेत्र: पश्चिमी राजस्थान (बाड़मेर और जैसलमेर)।
  • विशेषता: मांगणियार मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के लोग हैं जो अपने हिंदू यजमानों के यहाँ गाते हैं। इनके प्रमुख वाद्य यंत्र कामायचा और खड़ताल हैं।
  • प्रसिद्ध कलाकार: साकर खान (कामायचा वादक), सद्दीक खान (खड़ताल के जादूगर) और अनवर खान।

C. लंगा गायकी (Langa)

  • क्षेत्र: पश्चिमी राजस्थान (बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर)।
  • विशेषता: इनके प्रमुख वाद्य यंत्र सिंधी सारंगी और अलगोजा हैं।

D. तालबंदी गायकी

  • क्षेत्र: पूर्वी राजस्थान (भरतपुर, धौलपुर, करौली – सवाई माधोपुर)।
  • विशेषता: यह शास्त्रीय संगीत से प्रभावित गायन शैली है, जो प्राचीन कवियों की रचनाओं पर आधारित होती है।

2. राजस्थान के प्रमुख लोकगीत (Famous Folk Songs)

परीक्षाओं में लोकगीतों की विषयवस्तु या क्षेत्र पूछा जाता है:

  • कुरजां (Kurja): यह मारवाड़ क्षेत्र का विरह गीत (Separation Song) है। इसमें पत्नी ‘कुरजां’ पक्षी को संदेशवाहक बनाकर परदेस गए पति को संदेश भेजती है।
  • मूमल (Moomal): यह जैसलमेर का शृंगारिक गीत है। मूमल ‘लोद्रवा’ (जैसलमेर) की राजकुमारी थी। इस गीत में उसके नख-शिख (सुंदरता) का वर्णन है।
  • गोरबंद (Gorband): यह शेखावाटी और मारवाड़ में गाया जाता है। ‘गोरबंद’ ऊँट के गले का एक आभूषण है, जिसे गूंथते समय यह गीत गाया जाता है।
  • झोरावा (Jhorawa): यह जैसलमेर क्षेत्र का प्रसिद्ध विरह गीत है।
  • चिरमी (Chirmi): यह गीत नवविवाहिता द्वारा अपने पीहर (मायके) वालों की याद में गाया जाता है (चिरमी एक पौधा है)।
  • सीठणे (Sithne): विवाह के अवसर पर महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले गाली-गीत (Teasing Songs) सीठणे कहलाते हैं।
  • हिचकी (Hichki): यह मेवात (अलवर) क्षेत्र का प्रसिद्ध गीत है, जो किसी की याद आने पर गाया जाता है।
  • मोरिया (Moriya): यह उस लड़की द्वारा गाया जाता है जिसकी सगाई तो हो चुकी है, लेकिन विवाह में देरी हो रही है।
  • पावणा (Pawana): नए दामाद के ससुराल आने पर भोजन कराते समय गाया जाने वाला गीत।

3. राजस्थान के प्रमुख वाद्य यंत्र (Musical Instruments)

वाद्य यंत्रों को 4 श्रेणियों में बांटा गया है। परीक्षा में सबसे ज्यादा प्रश्न यही आता है कि “निम्न में से कौन सा तत वाद्य है या सुषिर वाद्य है?”

A. तत वाद्य (String Instruments)

ये वे वाद्य यंत्र हैं जिनमें तार (Strings) के माध्यम से स्वर उत्पन्न होते हैं।

  • रावणहत्था (Ravanhattha): यह राजस्थान का सबसे प्राचीन वाद्य यंत्र है। यह आधे कटे नारियल की कटोरी पर खाल मढ़कर बनाया जाता है। इसमें 9 तार होते हैं। इसका उपयोग पाबूजी की फड़ बांचते समय किया जाता है।
  • जंतर (Jantar): यह वीणा का प्रारंभिक रूप है। इसका उपयोग गुर्जर भोपों द्वारा देवनारायण जी की फड़ बांचते समय किया जाता है।
  • सारंगी (Sarangi): यह सभी तत वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ और सबसे विकसित है। इसे लंगा जाति द्वारा बजाया जाता है।
  • कामायचा (Kamaicha): यह सारंगी जैसा ही होता है। इसे मांगणियार जाति बजाती है।
  • भपंग (Bhapang): यह अलवर का प्रसिद्ध है। जहूर खां मेवाती ‘भपंग के जादूगर’ कहलाते हैं।
  • अन्य: एकतारा, रबाब, रवाज, चौतारा (तंदूरा)।

B. सुषिर वाद्य (Wind Instruments)

ये वे वाद्य यंत्र हैं जिन्हें फूंक मारकर (हवा से) बजाया जाता है।

  • अलगोजा (Algoza): यह राजस्थान का ‘राज्य वाद्य यंत्र’ (State Instrument) है। इसमें बांसुरी जैसी दो नलियाँ होती हैं जिन्हें कलाकार एक साथ मुँह में रखकर बजाता है। रामनाथ चौधरी (जयपुर) प्रसिद्ध अलगोजा वादक हैं।
  • मोरचंग (Morchang): यह लोहे का बना राजस्थान का सबसे छोटा वाद्य यंत्र है, जिसे होंठों के बीच रखकर बजाया जाता है। इसे ‘Jew’s Harp’ भी कहते हैं।
  • शहनाई (Shehnai): यह सुषिर वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ और सबसे सुरीला वाद्य यंत्र है।
  • बांकिया (Bankiya): यह पीतल का बना होता है और कच्ची घोड़ी नृत्य में झांझ के साथ बजता है।
  • अन्य: पूंगी (बीन), नड़ (करना भील प्रसिद्ध वादक), सतारा, मशक।

C. अवनद्ध / ताल वाद्य (Percussion Instruments)

ये वे वाद्य यंत्र हैं जो चमड़े (Leather) से मढ़े होते हैं और जिन पर चोट मारकर ध्वनि निकाली जाती है।

  • चंग: होली के अवसर पर शेखावाटी में बजाया जाता है।
  • बम / टामक: यह एक बहुत बड़ा नगाड़ा है जिसे मेवात (भरतपुर-अलवर) में ‘बम नृत्य’ के दौरान बजाया जाता है।
  • मांदल (Mandal): यह मिट्टी से बना वाद्य यंत्र है जिसे शिव-पार्वती का वाद्य माना जाता है (गवरी नृत्य में प्रयोग)।
  • अन्य: ढोल, नौबत (मंदिरों में), खंजरी, माटे (पाबूजी के पवाड़े गाते समय)।

D. घन वाद्य (Solid/Metal Instruments)

ये धातु या लकड़ी से बने होते हैं जिन्हें आपस में टकराकर बजाया जाता है।

  • मंजीरा (Manjira): पीतल/कांसे का बना। रामदेवजी के मेले में ‘तेरहताली नृत्य’ में 13 मंजीरे बजते हैं।
  • खड़ताल (Khartal): यह लकड़ी के टुकड़ों से बनी होती है (मांगणियारों का प्रिय)। सद्दीक खान इसके जादूगर हैं।
  • झांझ (Jhanjh): यह मंजीरे का बड़ा रूप है। (कच्ची घोड़ी नृत्य में प्रयुक्त)।
  • अन्य: चिमटा, घुंघरू, थाली, लेजिम (गरासियों का वाद्य)।

परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)

  • रामनाथ चौधरी (Ramnath Chaudhary): ये अलगोजा बजाने के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं क्योंकि ये अलगोजा मुँह से नहीं, बल्कि ‘नाक’ (Nose) से बजाते हैं।
  • सतारा (Satara): नाम में ‘तार’ होने के बावजूद यह तत वाद्य नहीं है, बल्कि यह सुषिर वाद्य (Wind Instrument) है (यह बांसुरी, अलगोजा और शहनाई का मिश्रण है)।
  • जंतर: यह वाद्य यंत्र गले में लटकाकर खड़े होकर बजाया जाता है।

अभ्यास हेतु 20 महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs)

प्रश्न 1: राजस्थान का राज्य गीत “केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देस” किस गायन शैली में गाया गया है? उत्तर: मांड गायकी में।

प्रश्न 2: बीकानेर की किस प्रसिद्ध मांड गायिका को ‘मरु कोकिला’ कहा जाता है? उत्तर: अल्लाह जिलाई बाई को।

प्रश्न 3: मांगणियार जाति का संबंध राजस्थान के किस क्षेत्र से है और इनका मुख्य वाद्य यंत्र कौन सा है? उत्तर: पश्चिमी राजस्थान (बाड़मेर-जैसलमेर), मुख्य वाद्य यंत्र: कामायचा व खड़ताल।

प्रश्न 4: ‘कुरजां’ पक्षी को संदेशवाहक बनाकर गाया जाने वाला विरह गीत मुख्य रूप से कहाँ का प्रसिद्ध है? उत्तर: मारवाड़ क्षेत्र का।

प्रश्न 5: जैसलमेर का वह प्रसिद्ध लोकगीत कौन सा है जिसमें ‘लोद्रवा’ की राजकुमारी के सौंदर्य का वर्णन है? उत्तर: मूमल।

प्रश्न 6: विवाह के अवसर पर महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले गाली-गीत (Teasing Songs) क्या कहलाते हैं? उत्तर: सीठणे।

प्रश्न 7: ऊँट के गले का आभूषण गूंथते समय महिलाओं द्वारा कौन सा गीत गाया जाता है? उत्तर: गोरबंद गीत।

प्रश्न 8: ‘हिचकी’ (याद आने पर गाया जाने वाला गीत) राजस्थान के किस क्षेत्र का प्रसिद्ध है? उत्तर: मेवात (अलवर) क्षेत्र का।

प्रश्न 9: राजस्थान का सबसे प्राचीन वाद्य यंत्र कौन सा है, जो आधे कटे नारियल की कटोरी से बनता है? उत्तर: रावणहत्था।

प्रश्न 10: पाबूजी की फड़ बांचते समय भोपों द्वारा किस वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है? उत्तर: रावणहत्था का।

प्रश्न 11: देवनारायण जी की फड़ का वाचन करते समय गुर्जर भोपे किस वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं? उत्तर: जंतर वाद्य यंत्र का।

प्रश्न 12: राजस्थान का ‘राज्य वाद्य यंत्र’ (State Instrument) कौन सा है? उत्तर: अलगोजा।

प्रश्न 13: वह कौन सा वाद्य यंत्र है जिसमें दो बांसुरियाँ एक साथ रखकर फूँक मारकर बजाई जाती हैं? उत्तर: अलगोजा।

प्रश्न 14: लोहे से बना राजस्थान का सबसे छोटा वाद्य यंत्र कौन सा है, जिसे होंठों के बीच रखकर बजाया जाता है? उत्तर: मोरचंग (Jew’s Harp)।

प्रश्न 15: ‘सतारा’ किस प्रकार का वाद्य यंत्र है? (तत, सुषिर, अवनद्ध या घन) उत्तर: सुषिर वाद्य (हवा से बजने वाला)।

प्रश्न 16: ‘बम’ या टामक नामक विशाल नगाड़े का प्रयोग किस क्षेत्र में किया जाता है? उत्तर: मेवात (भरतपुर-अलवर) में (बम नृत्य के दौरान)।

प्रश्न 17: जहूर खां मेवाती को किस वाद्य यंत्र का जादूगर कहा जाता है? उत्तर: भपंग का।

प्रश्न 18: रामदेवजी के मेले में कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा तेरहताली नृत्य में किस वाद्य यंत्र का सर्वाधिक प्रयोग होता है? उत्तर: मंजीरा (यह एक घन वाद्य है)।

प्रश्न 19: कच्ची घोड़ी नृत्य के दौरान बांकिया के साथ कौन सा घन वाद्य यंत्र बजाया जाता है? उत्तर: झांझ (मंजीरे का बड़ा रूप)।

प्रश्न 20: शिव-पार्वती का वाद्य यंत्र माना जाने वाला ‘मांदल’ किस सामग्री से बनाया जाता है? उत्तर: पकी हुई मिट्टी (टेराकोटा) से।

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