
परिचय
राजस्थान के प्रमुख जनजातीय आंदोलनों—भील आंदोलन, मीणा आंदोलन, गोविंद गुरु, मानगढ़ आंदोलन एवं जनजातीय जागरण का सम्पूर्ण अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police, VDO एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण Rajasthan History Notes।
राजस्थान के इतिहास में किसान आंदोलनों के साथ-साथ जनजातीय (आदिवासी) आंदोलनों का भी विशेष महत्व है। सदियों से जंगलों और पहाड़ों में स्वतंत्र जीवन जीने वाले भील, गरासिया और मीणा जनजातियों पर जब अंग्रेजों और रियासती राजाओं ने नए वन कानून थोपे, उनके पारंपरिक अधिकारों (जैसे शराब बनाना, वन उपज इकट्ठा करना) को छीना और उन पर भारी कर (Taxes) लगा दिए, तो इन जनजातियों ने अपने हकों के लिए भीषण संघर्ष किया।
प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RSMSSB, REET) में भगत आंदोलन, मानगढ़ धाम हत्याकांड, एकी आंदोलन (मेवाड़ पुकार) और जरायम पेशा कानून से निश्चित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं। आज के इस पोस्ट में हम राजस्थान के प्रमुख जनजाति आंदोलनों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. भील / भगत आंदोलन (Bhil or Bhagat Movement)
दक्षिणी राजस्थान (विशेषकर डूंगरपुर, बांसवाड़ा, मेवाड़ और सिरोही) में भील और गरासिया जनजातियों में सामाजिक और राजनीतिक जन-जागृति पैदा करने का श्रेय गोविंद गिरी (Govind Giri) को जाता है।
गोविंद गिरी और सम्प सभा (Samp Sabha)
- गोविंद गिरी का जन्म: इनका जन्म डूंगरपुर जिले के बासिया (बेड़सा) गाँव में 1858 ई. में एक बंजारा परिवार (Banjara Family) में हुआ था। (परीक्षाओं में इनकी जाति बहुत बार पूछी गई है)।
- प्रेरणा स्रोत: गोविंद गिरी ने महर्षि दयानंद सरस्वती की प्रेरणा से आदिवासियों के उत्थान का कार्य शुरू किया। इनके आध्यात्मिक गुरु ‘राजगिरी’ थे।
- सम्प सभा की स्थापना (1883 ई.): भीलों में आपसी एकता, प्रेम और भाईचारा बढ़ाने तथा उन्हें कुरीतियों (शराब, चोरी, अंधविश्वास) से दूर रखने के लिए गोविंद गिरी ने सिरोही में ‘सम्प सभा’ की स्थापना की। राजस्थानी भाषा में ‘सम्प’ का अर्थ है – आपसी प्रेम और भाईचारा।
- सम्प सभा के नियम: इस सभा के 10 मुख्य नियम थे। जो भील इस सभा का सदस्य बनता था, वह ‘भगत’ कहलाता था, इसीलिए इस आंदोलन को भगत आंदोलन भी कहा गया। सुरजी भगत इनके प्रमुख सहयोगी थे।
मानगढ़ धाम हत्याकांड (Mangarh Massacre) – 17 नवंबर 1913
- घटना का कारण: सम्प सभा का वार्षिक अधिवेशन हर वर्ष अश्विन शुक्ल पूर्णिमा को बांसवाड़ा की मानगढ़ पहाड़ी पर होता था। 1913 में भील अपनी मांगों को लेकर मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्रित हुए।
- गोलीबारी (17 नवंबर 1913): अंग्रेजों को लगा कि भील अपना अलग राज्य (‘भील राज’) स्थापित करना चाहते हैं। इसलिए मेवाड़ भील कोर (Mewar Bhil Corps – MBC) और अन्य अंग्रेजी सेनाओं ने मानगढ़ पहाड़ी को घेरकर अंधाधुंध मशीनगनों से फायरिंग कर दी।
- शहीद: इस भीषण नरसंहार में लगभग 1500 से अधिक भील स्त्री-पुरुष शहीद हो गए।
- राजस्थान का जलियांवाला बाग: इस घटना को राजस्थान का जलियांवाला बाग हत्याकांड कहा जाता है। (हालांकि जलियांवाला बाग की घटना इसके 6 साल बाद 1919 में हुई थी)।
- परिणाम: गोविंद गिरी और उनके शिष्य पूंजा धीरजी को गिरफ्तार कर लिया गया। गोविंद गिरी को आजीवन कारावास की सजा मिली, लेकिन सदव्यवहार के कारण उन्हें बाद में छोड़ दिया गया। उन्होंने अपना अंतिम समय गुजरात के ‘कंबोई’ नामक स्थान पर बिताया।
2. एकी आंदोलन या भौमट भील आंदोलन (Eki Movement)
गोविंद गिरी के बाद भीलों में राजनीतिक जागृति और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने का कार्य मोतीलाल तेजावत (Motilal Tejawat) ने किया।
मोतीलाल तेजावत का परिचय
- जन्म: इनका जन्म उदयपुर की झाड़ोल तहसील के कोलियारी गाँव में एक ओसवाल (बनिया) परिवार में हुआ था। ये झाड़ोल ठिकाने में ‘कामदार’ के पद पर कार्य करते थे।
- उपाधियां: भील जनजाति के लोग इन्हें प्यार से ‘बावजी’ (Bawji) और ‘भीलों का मसीहा’ (Messiah of Bhils) कहकर पुकारते थे।
आंदोलन की शुरुआत और ‘मेवाड़ पुकार’
- एकी आंदोलन की शुरुआत (1921 ई.): मोतीलाल तेजावत ने चित्तौड़गढ़ के राशमी परगने में स्थित मातृकुंडिया (Matrukundiya) नामक स्थान से इस आंदोलन की शुरुआत की।
- नोट: मातृकुंडिया को ‘राजस्थान का हरिद्वार’ कहा जाता है। ‘एकी’ का अर्थ है – एकता। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भीलों को एकजूट कर उन्हें जागीरदारों की बेगार और भारी लगान से मुक्ति दिलाना था।
- मेवाड़ पुकार (Mewar Pukar): मोतीलाल तेजावत ने मेवाड़ के महाराणा (फतहसिंह) के समक्ष किसानों और आदिवासियों की मांगों का एक 21 सूत्रीय मांग पत्र (21-Point Demand Letter) प्रस्तुत किया। इस ऐतिहासिक मांग पत्र को ही इतिहास में ‘मेवाड़ पुकार’ कहा जाता है।
- महाराणा ने 21 में से 18 मांगें मान लीं, लेकिन वन संपदा अधिकार, बेगार और सुअरों को मारने की 3 मांगें अस्वीकार कर दीं, जिससे आंदोलन उग्र हो गया।
नीमड़ा हत्याकांड (Neemda Massacre) – 1922 ई.
- मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में विजयनगर राज्य (गुजरात) के नीमड़ा गाँव में भीलों का एक विशाल सम्मेलन हो रहा था।
- मेवाड़ भील कोर (MBC) की सेना ने इस सभा पर गोलियां चला दीं, जिसमें लगभग 1200 भील शहीद हो गए। इसे ‘नीमड़ा हत्याकांड’ के नाम से जाना जाता है।
- गांधीजी का हस्तक्षेप: महात्मा गांधी के कहने पर मोतीलाल तेजावत ने 1929 ई. में ईडर (गुजरात) पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
3. मीणा आंदोलन (Meena Movement)
राजस्थान के पूर्वी भाग (मुख्यतः जयपुर राज्य) में मीणा जनजाति द्वारा अपने स्वाभिमान और अधिकारों के लिए यह ऐतिहासिक आंदोलन चलाया गया। यह आंदोलन किसी जमींदार के खिलाफ नहीं, बल्कि एक दमनकारी कानून के खिलाफ था।
जरायम पेशा कानून (Jayaram Pesha Act) और इसके कारण
- क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट (1924 ई.): भारत सरकार ने 1924 में एक कानून पारित किया जिसमें कुछ जातियों को जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया गया।
- जरायम पेशा कानून (1930 ई.): 1924 के एक्ट के आधार पर ही जयपुर राज्य ने 1930 में ‘जरायम पेशा कानून’ (दादरसी कानून) लागू किया।
- कानून की शर्तें: इस काले कानून के तहत जयपुर राज्य के सभी मीणा स्त्री-पुरुषों (जिनकी आयु 12 वर्ष से अधिक थी), उन्हें प्रतिदिन नजदीकी पुलिस थाने में जाकर हाजिरी (Attendance) देना अनिवार्य कर दिया गया। इससे पूरी मीणा जाति का स्वाभिमान आहत हुआ।
आंदोलन का संगठन और विकास
- मीणा क्षेत्रीय महासभा (1933 ई.): इस दमनकारी कानून का विरोध करने के लिए 1933 में ‘मीणा क्षेत्रीय महासभा’ की स्थापना की गई।
- नीम का थाना सम्मेलन (1944 ई.): संत मुनि मगन सागर (Muni Magan Sagar) की अध्यक्षता में सीकर के नीम का थाना में मीणा समाज का एक विशाल राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। मुनि मगन सागर ने ‘मीन पुराण’ (Meen Purana) नामक ग्रंथ लिखकर मीणाओं को उनके गौरवशाली अतीत (मत्स्यावतार का वंशज) की याद दिलाई।
- मीणा सुधार समिति (1944 ई.): नीम का थाना सम्मेलन में ही पं. बंशीधर शर्मा की अध्यक्षता में ‘जयपुर राज्य मीणा सुधार समिति’ का गठन किया गया।
- बागावास सम्मेलन (1946 ई.): जयपुर के बागावास में एक विशाल सम्मेलन हुआ जिसमें लगभग 2600 मीणा चौकीदारों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसे ‘मुक्ति दिवस’ के रूप में मनाया गया।
कानून की समाप्ति
लंबे और शांतिपूर्ण संघर्ष के बाद, भारत की स्वतंत्रता के पश्चात 1952 ई. में ‘जरायम पेशा कानून’ को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया और मीणा समाज को इस कलंक से मुक्ति मिली।
परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- मेवाड़ भील कोर (Mewar Bhil Corps – MBC): इसकी स्थापना 1841 ई. में की गई थी और इसका मुख्यालय खेरवाड़ा (उदयपुर) में था। इसी सेना ने मानगढ़ और नीमड़ा दोनों जगह गोलियां चलाई थीं।
- ठक्कर बाप्पा (Thakkar Bapa): इन्हें पूरे भारत में ‘आदिवासियों का मसीहा’ (Messiah of Tribals) कहा जाता है। जरायम पेशा कानून को रद्द करवाने में इन्होंने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- मोतीलाल तेजावत के आंदोलन का मुख्य केंद्र उदयपुर का ‘भौमट’ (Bhomat) क्षेत्र था, इसीलिए इसे भौमट भील आंदोलन भी कहा जाता है।
अभ्यास हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न (20 Important Questions / PYQs)
प्रश्न 1: भीलों में जनजागृति पैदा करने के लिए ‘सम्प सभा’ की स्थापना किसने की थी?
उत्तर: गोविंद गिरी ने।
प्रश्न 2: सम्प सभा की स्थापना किस वर्ष और कहाँ की गई थी?
उत्तर: 1883 ई. में सिरोही में।
प्रश्न 3: राजस्थानी भाषा में ‘सम्प’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: आपसी प्रेम और भाईचारा।
प्रश्न 4: गोविंद गिरी का जन्म किस परिवार / जाति में हुआ था?
उत्तर: बंजारा परिवार में (बासिया गाँव, डूंगरपुर)।
प्रश्न 5: मानगढ़ धाम हत्याकांड (राजस्थान का जलियांवाला बाग) किस तिथि को घटित हुआ था?
उत्तर: 17 नवंबर 1913 को।
प्रश्न 6: मानगढ़ की पहाड़ी पर एकत्रित भीलों पर किस सैन्य टुकड़ी ने गोलियां चलाई थीं?
उत्तर: मेवाड़ भील कोर (MBC) ने।
प्रश्न 7: भीलों द्वारा गोविंद गिरी को अपना आध्यात्मिक नेता मानने के कारण इस आंदोलन को क्या नाम दिया गया?
उत्तर: भगत आंदोलन।
प्रश्न 8: ‘एकी आंदोलन’ (Eki Movement) की शुरुआत किसके द्वारा की गई थी?
उत्तर: मोतीलाल तेजावत द्वारा।
प्रश्न 9: मोतीलाल तेजावत को आदिवासियों के बीच किस उपनाम से जाना जाता था?
उत्तर: बावजी (Bawji) और ‘भीलों का मसीहा’।
प्रश्न 10: एकी आंदोलन की शुरुआत 1921 में किस स्थान से हुई थी जिसे ‘राजस्थान का हरिद्वार’ कहा जाता है?
उत्तर: मातृकुंडिया (राशमी, चित्तौड़गढ़) से।
प्रश्न 11: ‘मेवाड़ पुकार’ क्या था?
उत्तर: मोतीलाल तेजावत द्वारा महाराणा मेवाड़ को सौंपा गया 21 सूत्रीय मांग पत्र।
प्रश्न 12: 1922 ई. का प्रसिद्ध ‘नीमड़ा हत्याकांड’ किस किसान/जनजाति आंदोलन से संबंधित है?
उत्तर: एकी आंदोलन (मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में)।
प्रश्न 13: जयपुर राज्य में मीणा जाति पर कौन सा कठोर कानून लागू किया गया था जिसके तहत उन्हें प्रतिदिन थाने में हाजिरी देनी होती थी?
उत्तर: जरायम पेशा कानून (1930 ई.)।
प्रश्न 14: जरायम पेशा कानून का विरोध करने के लिए ‘मीणा क्षेत्रीय महासभा’ की स्थापना किस वर्ष की गई?
उत्तर: 1933 ई. में।
प्रश्न 15: 1944 ई. में मीणा समाज का विशाल सम्मेलन ‘नीम का थाना’ में किसकी अध्यक्षता में हुआ था?
उत्तर: जैन मुनि मगन सागर की अध्यक्षता में।
प्रश्न 16: मीणाओं के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाला ‘मीन पुराण’ ग्रंथ किसने लिखा था?
उत्तर: मुनि मगन सागर ने।
प्रश्न 17: ‘जरायम पेशा कानून’ (Jayaram Pesha Act) को अंतिम रूप से कब रद्द (Abolish) किया गया?
उत्तर: 1952 ई. में।
प्रश्न 18: मेवाड़ भील कोर (MBC) की स्थापना किस वर्ष की गई थी जिसका मुख्यालय खेरवाड़ा था?
उत्तर: 1841 ई. में।
प्रश्न 19: भारत स्तर पर ‘आदिवासियों का मसीहा’ (Messiah of Tribals) किसे कहा जाता है?
उत्तर: ठक्कर बाप्पा को।
प्रश्न 20: मोतीलाल तेजावत ने किस रियासत के ‘कामदार’ के पद से इस्तीफा देकर भीलों की सेवा का कार्य शुरू किया था?
उत्तर: झाड़ोल ठिकाने (उदयपुर) से।
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