
परिचय
राजस्थान के प्रमुख राजवंशों में कछवाहा राजवंश का महत्वपूर्ण स्थान है। इस वंश की राजधानी प्रारंभ में आमेर (Amber) थी, जिसे बाद में सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1727 ई. में जयपुर स्थानांतरित किया। कछवाहा शासकों ने मुगल साम्राज्य के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित कर अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाया।
राजधानी (प्रारंभ): आमेर
नई राजधानी: जयपुर (1727 ई.)
वंश: सूर्यवंशी कछवाहा राजपूत
कछवाहा वंश की उत्पत्ति
- कछवाहा स्वयं को भगवान श्रीराम के पुत्र कुश का वंशज मानते हैं।
- प्रारंभिक शासन दौसा में स्थापित हुआ।
- बाद में दूल्हराय (दुर्लभराज) ने मीणाओं को पराजित कर आमेर पर अधिकार किया।
- आमेर राज्य धीरे-धीरे राजस्थान का एक शक्तिशाली राज्य बना।
कछवाहा वंश का संक्षिप्त वंशक्रम
| शासक | प्रमुख कार्य |
|---|---|
| दूल्हराय | आमेर राज्य की स्थापना |
| काकिल देव | आमेर पर पूर्ण अधिकार |
| भारमल | मुगलों से वैवाहिक संबंध |
| भगवानदास | मुगल दरबार में प्रतिष्ठा |
| मानसिंह प्रथम | महान सेनापति |
| मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम | शिवाजी एवं औरंगजेब काल |
| रामसिंह प्रथम | असम अभियान |
| बिशन सिंह | जाट संघर्ष |
| सवाई जयसिंह द्वितीय | जयपुर नगर एवं जंतर-मंतर |
राजा भारमल (1548–1574 ई.)
परिचय
- आमेर के प्रथम शासक जिन्होंने मुगलों से मैत्री स्थापित की।
- 1562 ई. में अपनी पुत्री हरखा बाई (जोधाबाई/हीर कुंवरी) का विवाह मुगल सम्राट अकबर से कराया।
- इस विवाह से कछवाहा राज्य की प्रतिष्ठा अत्यधिक बढ़ी।
महत्वपूर्ण तथ्य
- मुगल-राजपूत संबंधों की शुरुआत।
- आमेर को राजनीतिक सुरक्षा मिली।
- कछवाहा मुगल प्रशासन में प्रमुख स्थान प्राप्त करने लगे।
राजा भगवानदास (1574–1589 ई.)
- राजा भारमल के पुत्र।
- अकबर के विश्वसनीय राजपूत सरदार।
- अनेक सैन्य अभियानों में भाग लिया।
- पुत्र मानसिंह को उच्च शिक्षा एवं सैन्य प्रशिक्षण दिया।
राजा मानसिंह प्रथम (1589–1614 ई.)
परिचय
- जन्म: 21 दिसंबर 1550
- पिता: भगवानदास
- दादा: भारमल
- मुगल सम्राट: अकबर
मानसिंह की उपाधियाँ
- सप्तहजारी मनसबदार
- अकबर के नवरत्नों में प्रमुख सेनानायक (लोकप्रिय परंपरा में उल्लेखित)
- महान राजपूत सेनापति
मानसिंह का सैन्य जीवन
उन्होंने मुगल साम्राज्य के अनेक युद्धों का नेतृत्व किया।
प्रमुख अभियान
1. हल्दीघाटी का युद्ध (1576)
- स्थान: हल्दीघाटी
- मुगल सेना का नेतृत्व – राजा मानसिंह
- मेवाड़ की सेना – महाराणा प्रताप
- परिणाम – निर्णायक विजय किसी की नहीं, परंतु मुगलों ने रणक्षेत्र पर अधिकार रखा।
2. बंगाल अभियान
- अफगानों का दमन।
- बंगाल में मुगल सत्ता मजबूत की।
3. उड़ीसा अभियान
- अफगानों को पराजित किया।
- उड़ीसा मुगल साम्राज्य में शामिल हुआ।
4. काबुल अभियान
- सीमाओं की सुरक्षा।
- उत्तर-पश्चिम में विद्रोह शांत किया।
मानसिंह की प्रशासनिक उपलब्धियाँ
- आमेर दुर्ग का विस्तार।
- अनेक मंदिरों का निर्माण।
- वृंदावन में प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर का निर्माण कराया।
- जलाशय एवं महलों का निर्माण।
मानसिंह के प्रमुख निर्माण
- आमेर महल विस्तार
- गोविंद देवजी मंदिर
- जगत शिरोमणि मंदिर (उनके काल से संबंधित परंपरा)
परीक्षा हेतु तथ्य
✔ हल्दीघाटी युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व – मानसिंह
✔ अकबर के प्रमुख सेनापति
✔ सप्तहजारी मनसबदार
✔ बंगाल के सूबेदार
मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम (1621–1667 ई.)
परिचय
- जन्म: 1611 ई.
- पिता: महासिंह
- शासनकाल: 1621–1667
मिर्जा राजा की उपाधि
उन्हें शाहजहाँ ने “मिर्जा राजा” की उपाधि प्रदान की।
शाहजहाँ काल में योगदान
- दक्षिण भारत के अभियानों में सफलता।
- कंधार अभियान।
- बुंदेलखंड अभियान।
औरंगजेब काल
सबसे प्रसिद्ध घटना—
शिवाजी अभियान (1665)
- औरंगजेब ने शिवाजी के विरुद्ध भेजा।
- पुरंदर की संधि (1665) करवाई।
- शिवाजी को मुगल दरबार जाने के लिए तैयार किया।
पुरंदर की संधि (1665)
मुख्य बिंदु
- शिवाजी ने 23 किले मुगलों को सौंपे।
- 12 किले अपने पास रखे।
- पुत्र संभाजी को मुगल सेवा में भेजा।
मिर्जा राजा जयसिंह की उपलब्धियाँ
- उत्कृष्ट कूटनीतिज्ञ
- सफल सेनापति
- दक्षिण अभियान में सफलता
- मुगल साम्राज्य के सबसे योग्य राजपूत सेनापति
मृत्यु
- 1667 ई.
- बुरहानपुर के निकट।
सवाई जयसिंह द्वितीय (1699–1743 ई.)
परिचय
- जन्म: 3 नवंबर 1688
- पिता: बिशन सिंह
- शासनकाल: 1699–1743
‘सवाई’ उपाधि
औरंगजेब ने उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें “सवाई” की उपाधि दी।
अर्थ
एक से सवा गुना अधिक योग्य।
जयपुर नगर की स्थापना
स्थापना
1727 ई.
राजधानी को आमेर से जयपुर स्थानांतरित किया गया।
जयपुर बसाने के कारण
- आमेर में जल की कमी।
- बढ़ती जनसंख्या।
- व्यापार का विस्तार।
- सुरक्षा।
- वैज्ञानिक नगर योजना।
जयपुर के वास्तुकार
विद्याधर भट्टाचार्य
उन्होंने शिल्पशास्त्र एवं वास्तुशास्त्र के अनुसार नगर की योजना बनाई।
जयपुर की विशेषताएँ
- नौ चौकड़ियाँ
- चौड़ी सड़कें
- नियोजित बाजार
- सुरक्षा व्यवस्था
- जल निकासी प्रणाली
जंतर-मंतर
सवाई जयसिंह महान खगोलशास्त्री थे।
उन्होंने पाँच वेधशालाएँ बनवाई—
| स्थान | राज्य |
|---|---|
| जयपुर | राजस्थान |
| दिल्ली | दिल्ली |
| उज्जैन | मध्यप्रदेश |
| वाराणसी | उत्तरप्रदेश |
| मथुरा | उत्तरप्रदेश (अब अधिकांश नष्ट) |
सम्राट यंत्र
विश्व का सबसे बड़ा पत्थर का सूर्यघड़ी यंत्र।
जयसिंह की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ
- ज़ीज़-ए-मुहम्मदशाही का निर्माण।
- खगोल विज्ञान का विकास।
- यूरोपीय खगोल विज्ञान का अध्ययन।
धार्मिक कार्य
- अश्वमेध यज्ञ।
- वाजपेय यज्ञ।
- अनेक मंदिरों का निर्माण।
सांस्कृतिक योगदान
- संस्कृत विद्वानों का संरक्षण।
- ज्योतिष का विकास।
- वास्तुकला का विकास।
- कला एवं साहित्य का संरक्षण।
आर्थिक योगदान
- व्यापार को बढ़ावा।
- व्यवस्थित बाजार।
- कर व्यवस्था में सुधार।
- नई राजधानी के कारण आर्थिक उन्नति।
सवाई जयसिंह की प्रमुख उपलब्धियाँ
✔ जयपुर नगर की स्थापना
✔ जंतर-मंतर निर्माण
✔ वैज्ञानिक नगर योजना
✔ खगोल विज्ञान का विकास
✔ ज़ीज़-ए-मुहम्मदशाही
कछवाहा राजवंश का राजस्थान में योगदान
राजनीतिक
- मुगल-राजपूत संबंधों को मजबूत किया।
- राजस्थान में स्थिर शासन।
स्थापत्य
- आमेर महल
- जयगढ़
- नाहरगढ़ (बाद का विकास)
- जयपुर नगर
- जंतर-मंतर
धार्मिक
- गोविंद देवजी मंदिर
- अनेक वैष्णव मंदिर
वैज्ञानिक
- वेधशालाएँ
- ज्योतिष
- खगोल विज्ञान
महत्वपूर्ण तथ्य (One Liner)
- कछवाहा राजवंश की राजधानी – आमेर
- नई राजधानी – जयपुर
- जयपुर की स्थापना – 1727 ई.
- संस्थापक – सवाई जयसिंह द्वितीय
- वास्तुकार – विद्याधर भट्टाचार्य
- हल्दीघाटी में मुगल सेना का नेतृत्व – राजा मानसिंह
- पुरंदर की संधि – 1665 ई.
- मिर्जा राजा की उपाधि – शाहजहाँ
- सवाई की उपाधि – औरंगजेब
- गोविंद देवजी मंदिर का निर्माण – राजा मानसिंह
- जंतर-मंतर की सबसे बड़ी वेधशाला – जयपुर
- सम्राट यंत्र – विश्व की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्यघड़ी
- ज़ीज़-ए-मुहम्मदशाही – सवाई जयसिंह द्वितीय
परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (Important Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- जयपुर नगर की स्थापना किसने की?
- जयपुर नगर की स्थापना कब हुई?
- जयपुर के वास्तुकार कौन थे?
- हल्दीघाटी युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व किसने किया?
- पुरंदर की संधि किसके मध्य हुई?
- “मिर्जा राजा” की उपाधि किस शासक को मिली?
- “सवाई” की उपाधि किसने प्रदान की?
- गोविंद देवजी मंदिर का निर्माण किसने कराया?
- जंतर-मंतर कहाँ स्थित है?
- ज़ीज़-ए-मुहम्मदशाही किसने लिखी?
Chapter Summary (Quick Revision)
- कछवाहा राजवंश ने आमेर को एक शक्तिशाली राज्य बनाया।
- राजा भारमल ने अकबर से वैवाहिक संबंध स्थापित किए।
- राजा मानसिंह अकबर के सर्वश्रेष्ठ राजपूत सेनापतियों में से एक थे और हल्दीघाटी सहित अनेक अभियानों का नेतृत्व किया।
- मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम ने पुरंदर की संधि करवाई और मुगल साम्राज्य के प्रमुख कूटनीतिज्ञ एवं सेनानायक रहे।
- सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1727 ई. में जयपुर नगर की स्थापना की, जंतर-मंतर जैसी वेधशालाओं का निर्माण कराया और खगोल विज्ञान, वास्तुकला तथा नगर नियोजन में अमूल्य योगदान दिया।
नोट: राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं में इस अध्याय से हल्दीघाटी युद्ध, मुगल–राजपूत संबंध, पुरंदर की संधि, जयपुर की स्थापना, जंतर-मंतर, विद्याधर भट्टाचार्य तथा सवाई जयसिंह द्वितीय के वैज्ञानिक योगदान पर सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं।
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