राजस्थान का अपवाह तंत्र : आंतरिक जलप्रवाह (Inland Drainage) की नदियाँ | Rajasthan Geography Notes for RPSC, CET, REET, Patwar & All Exams 2026

राजस्थान का अपवाह तंत्र आंतरिक जलप्रवाह राजस्थान का अपवाह तंत्र : आंतरिक जलप्रवाह (Inland Drainage) की नदियाँ | Rajasthan Geography Notes for RPSC, CET, REET, Patwar & All Exams 2026

परिचय

राजस्थान का अपवाह तंत्र: आंतरिक जलप्रवाह (Inland Drainage) की नदियाँ | Rajasthan Geography Notes for RPSC, CET, REET, Patwar & All Exams 2026: राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों (विशेषकर थार मरुस्थल) के कारण यहाँ एक ऐसा अपवाह तंत्र पाया जाता है जो भारत के अन्य राज्यों में बहुत कम देखने को मिलता है। इसे आंतरिक जलप्रवाह प्रणाली (Inland Drainage System) कहा जाता है।

आंतरिक जलप्रवाह से तात्पर्य उन नदियों से है जो अपने उद्गम स्थल से निकलकर किसी सागर या महासागर (अरब सागर या बंगाल की खाड़ी) तक नहीं पहुँच पातीं, बल्कि कुछ दूरी तक बहने के बाद रेगिस्तान की रेत में विलीन हो जाती हैं या किसी स्थानीय खारे पानी की झील में गिर जाती हैं। राजस्थान के कुल अपवाह तंत्र का सर्वाधिक हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत आंतरिक जलप्रवाह का ही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कांतली, घग्गर और सांभर झील में गिरने वाली नदियों से सबसे ज्यादा प्रश्न बनते हैं।

1. घग्गर नदी (Ghaggar River)

यह राजस्थान की आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी नदी है और भारत की भी एक प्रमुख अंतःप्रवाही नदी है।

  • उद्गम (Origin): हिमाचल प्रदेश में हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों (कालका माता मंदिर के पास) से।
  • राजस्थान में प्रवेश: यह हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील के तलवाड़ा गाँव से राजस्थान में प्रवेश करती है। (तलवाड़ा झील राजस्थान की सबसे नीची झील मानी जाती है)।
  • अन्य नाम: मृत नदी (Dead River), नट नदी, सोतर नदी, सरस्वती और दृषद्वती (वैदिक कालीन नाम)।
  • प्रवाह क्षेत्र: हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ (नवीन जिला)।
  • अंतिम बिंदु: सामान्यतः यह हनुमानगढ़ के भटनेर दुर्ग के पास जाकर विलुप्त हो जाती है। लेकिन जब इसमें बाढ़ आती है, तो इसका पानी पाकिस्तान के फोर्ट अब्बास (Fort Abbas) तक पहुँच जाता है। पाकिस्तान में इस नदी के बहाव क्षेत्र को ‘हकरा’ (Hakra) कहा जाता है।
  • प्रमुख सभ्यता: राजस्थान की प्रसिद्ध सिंधु घाटी सभ्यता कालीन साइट कालीबंगा (Kalibanga) और पीलीबंगा इसी नदी के किनारे हनुमानगढ़ में विकसित हुई थीं।
  • विशेष शब्दावली: हनुमानगढ़ और गंगानगर में घग्गर नदी के पाट (बहाव क्षेत्र) को स्थानीय भाषा में ‘नाली’ (Nali) कहा जाता है।

2. कांतली नदी (Kantli River)

यह पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी नदी है (पूर्णतः का अर्थ है जिसका उद्गम और अंत दोनों राजस्थान में ही हो)।

  • उद्गम: सीकर जिले में खंडेला की पहाड़ियों से।
  • कुल लंबाई: लगभग 100 किलोमीटर।
  • प्रवाह क्षेत्र: सीकर, नीम का थाना (नया जिला) और झुंझुनूं। यह नदी झुंझुनूं जिले को लगभग दो बराबर भागों में बांटती है।
  • अंतिम बिंदु: यह चूरू जिले की सीमा से ठीक पहले झुंझुनूं के मंडरेला गाँव के पास रेत में विलुप्त हो जाती है।
  • प्रमुख सभ्यताएँ:
    1. गणेश्वर सभ्यता (Ganeshwar): नीम का थाना जिले में। इसे भारत में ‘ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ कहा जाता है।
    2. सुनारी सभ्यता (Sunari): यह भी नीम का थाना / झुंझुनूं सीमा पर इसी नदी के किनारे स्थित है जहाँ से लोहे गलाने की भट्टियां मिली हैं।
  • विशेष शब्दावली: कांतली नदी के अपवाह क्षेत्र (बेसिन) को स्थानीय भाषा में ‘तोरावाटी’ (Torawati) कहा जाता है।

3. काकणेय / काकनी / मसूरदी नदी (Kakneya / Kakni River)

यह राजस्थान की आंतरिक प्रवाह की सबसे छोटी नदी है।

  • उद्गम: जैसलमेर जिले के कोटरी गाँव की पहाड़ियों से।
  • कुल लंबाई: मात्र 17 किलोमीटर।
  • स्थानीय नाम: इसे स्थानीय लोग ‘मसूरदी’ नदी के नाम से जानते हैं।
  • विशेषता: यह नदी जैसलमेर में बहकर एक छोटी झील का निर्माण करती है जिसे ‘भुज झील’ (Bhuj Lake) कहा जाता है। अधिक वर्षा होने पर यह आगे मीठा खाड़ी नामक स्थान पर जाकर विलुप्त हो जाती है।

4. साबी नदी (Sabi River)

  • उद्गम: जयपुर जिले में सेवर की पहाड़ियों से।
  • प्रवाह क्षेत्र: जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा (नवीन जिले)।
  • अंतिम बिंदु: यह राजस्थान से निकलकर हरियाणा के गुरुग्राम (गुड़गांव) जिले में प्रवेश करती है और पाटोदी के पास नजफगढ़ झील में जाकर गिरती है।
  • प्रमुख सभ्यता: जयपुर ग्रामीण स्थित प्रसिद्ध जोधपुरा सभ्यता (Jodhpura Civilization) (जहाँ से हाथी दांत के अवशेष मिले हैं) इसी नदी के किनारे विकसित हुई थी।
  • विशेषता: पुराने समय में मानसून के दौरान यह नदी अपनी विनाशकारी लीला (बाढ़) के लिए प्रसिद्ध थी।

5. रुपारेल नदी (Ruparel River)

  • उद्गम: अलवर जिले में थानागाजी के पास उदयनाथ की पहाड़ियों से।
  • अन्य नाम: लसवारी नदी और वराह नदी।
  • प्रवाह क्षेत्र: अलवर, डीग और भरतपुर।
  • विशेषता: यह नदी भरतपुर की मोती झील (Moti Jheel) में अपना जल गिराती है। मोती झील को ‘भरतपुर की जीवन रेखा’ (Lifeline of Bharatpur) कहा जाता है। मोती झील से ही ‘सुजान गंगा’ नामक एक नहर निकाली गई है जो लोहागढ़ दुर्ग की खाई में पानी पहुँचाती है।

6. सांभर झील में गिरने वाली प्रमुख नदियाँ

राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील ‘सांभर झील’ (जयपुर ग्रामीण, डीडवाना-कुचामन और अजमेर की सीमा पर स्थित) भी एक बड़ा आंतरिक जल संग्रहण केंद्र है। इसमें मुख्य रूप से चार नदियाँ आकर गिरती हैं:

  1. मेंथा या मेंढा (Mentha): इसका उद्गम जयपुर के मनोहरपुर से होता है। यह उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई सांभर झील में गिरती है। सांभर झील में सर्वाधिक नमक (लवणता) इसी नदी द्वारा लाया जाता है। नागौर का प्रसिद्ध ‘नावां’ शहर (जहाँ आदर्श लवण मंडी है) इसी नदी के किनारे है।
  2. रूपनगढ़ (Rupangarh): इसका उद्गम अजमेर के किशनगढ़ (सलेमाबाद) से होता है। यह दक्षिण से उत्तर की ओर बहती हुई सांभर झील में गिरती है। प्रसिद्ध निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रधान पीठ (सलेमाबाद) इसी नदी के किनारे स्थित है।
  3. खंडेला (Khandela): सीकर जिले से निकलकर सांभर में गिरती है।
  4. खारी (Khari): नागौर क्षेत्र से निकलकर सांभर झील में अपना जल गिराती है।

परीक्षापयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)

  • नदी विहीन जिले: राजस्थान के दो पुराने जिले बीकानेर और चूरू ऐसे हैं जहाँ कोई भी नदी प्रवाहित नहीं होती है। (नवीन जिलों के परिसीमन के बाद फलोदी जिले का अधिकांश भाग भी इसी श्रेणी में आता है)।
  • पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली नदियों में लंबाई का तुलनात्मक अध्ययन: बनास (480 किमी, बंगाल की खाड़ी तंत्र) > लूनी (330 किमी राजस्थान में, अरब सागर तंत्र) > कांतली (100 किमी, आंतरिक तंत्र)।
  • राजस्थान का उत्तरी-पश्चिमी मरुस्थलीय भाग मुख्य रूप से आंतरिक जलप्रवाह प्रणाली का ही हिस्सा है।

पिछले वर्षों के प्रश्न (Previous Year Questions – PYQ)

प्रश्न 1: कांतली नदी का उद्गम स्थल कौन सा है और इसके बहाव क्षेत्र को क्या कहा जाता है? (RSMSSB Patwari 2016)

उत्तर: खंडेला की पहाड़ियाँ (सीकर), इसके बहाव क्षेत्र को ‘तोरावाटी’ कहा जाता है।

प्रश्न 2: राजस्थान की कौन सी नदी ‘मृत नदी’ (Dead River) के नाम से जानी जाती है? (RPSC 2nd Grade 2018, REET 2021)

उत्तर: घग्गर नदी।

प्रश्न 3: सांभर झील में गिरने वाली वह नदी कौन सी है जो झील में सर्वाधिक नमक जमा करती है? (RAS Pre 2013)

उत्तर: मेंथा (मेंढा) नदी।

प्रश्न 4: राजस्थान की आंतरिक जलप्रवाह की सबसे छोटी नदी कौन सी है जो भुज झील का निर्माण करती है? (Police Constable 2020)

उत्तर: काकणेय (काकनी या मसूरदी) नदी।

प्रश्न 5: निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रधान पीठ सलेमाबाद किस नदी के किनारे स्थित है? (LDC 2018)

उत्तर: रूपनगढ़ नदी।

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