राजस्थान के प्रमुख दुर्ग (किले) – चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ एवं अन्य प्रसिद्ध किले | Rajasthan GK Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग किले – चित्तौड़गढ़ कुंभलगढ़ एवं अन्य प्रसिद्ध किले राजस्थान के प्रमुख दुर्ग (किले) – चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ एवं अन्य प्रसिद्ध किले | Rajasthan GK Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान के प्रमुख दुर्गों (किलों) जैसे चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, जैसलमेर, आमेर एवं मेहरानगढ़ का इतिहास, निर्माण, विशेषताएँ एवं परीक्षा उपयोगी तथ्यों का सम्पूर्ण अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण Rajasthan GK Notes।

परिचय

राजस्थान को ‘दुर्गों का प्रदेश’ कहा जाता है। राजपूताना के शासकों ने अपनी सुरक्षा, निवास और सामरिक महत्व के लिए अरावली की पहाड़ियों, घने जंगलों और मरुस्थल के बीच अजेय दुर्गों का निर्माण करवाया। शुक्र नीति में दुर्गों की 9 श्रेणियां बताई गई हैं (जैसे- गिरि दुर्ग, जल दुर्ग, धान्वन दुर्ग आदि)।

यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर: 21 जून 2013 को राजस्थान के 6 पहाड़ी किलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। इन्हें याद रखने की एक बहुत ही आसान ट्रिक है: “चीकू गाजर आम” (ची- चित्तौड़गढ़, कू- कुंभलगढ़, गा- गागरोन, ज- जैसलमेर, र- रणथंभौर, आम- आमेर)।

प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, RSMSSB, REET) में इन दुर्गों के निर्माताओं, उपनामों, विशेष इमारतों और प्रसिद्ध कथनों से हर बार प्रश्न आते हैं। आइए, राजस्थान के प्रमुख दुर्गों के पहले भाग का विस्तार से अध्ययन करें।

1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग (Chittorgarh Fort)

यह राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग और सबसे बड़ा ‘लिविंग फोर्ट’ (Living Fort) है (जहाँ आज भी जनता निवास करती है)। इसके बारे में एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है: “गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया।”

  • श्रेणी और स्थान: यह एक ‘गिरि दुर्ग’ (पहाड़ी किला) है, जो मेसा के पठार (Mesa Plateau) पर स्थित है। यह गम्भीरी और बेड़च नदियों के संगम पर बना है। इसका आकार ‘व्हेल मछली’ के समान है।
  • निर्माता: इसका निर्माण 8वीं शताब्दी में मौर्य शासक चित्रांगद मोरी ने करवाया था।
  • प्रवेश द्वार: इस दुर्ग के 7 प्रवेश द्वार हैं, जिनमें ‘पाडन पोल’ मुख्य द्वार है।
  • प्रमुख दर्शनीय स्थल:
    1. विजय स्तंभ (Victory Tower): महाराणा कुंभा द्वारा मालवा विजय के उपलक्ष्य में निर्मित (9 मंजिल, 122 फीट ऊँचा)। इसे ‘भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष’ कहा जाता है।
    2. कीर्ति स्तंभ: 7 मंजिला, जो प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) को समर्पित है (जीजा सा बघेरवाल द्वारा निर्मित)।
    3. मीराबाई का मंदिर, कुंभश्याम मंदिर, रानी पद्मिनी का महल, संत रैदास की छतरी, और तुलजा भवानी का मंदिर।
  • चित्तौड़ के 3 साके (Sakas): यह दुर्ग राजस्थान में सर्वाधिक 3 साकों के लिए प्रसिद्ध है:
    1. प्रथम साका (1303 ई.): अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण (रावल रतन सिंह का केसरिया और रानी पद्मिनी का जौहर)।
    2. द्वितीय साका (1534 ई.): गुजरात के बहादुरशाह का आक्रमण (बाघ सिंह का केसरिया और रानी कर्मावती का जौहर)।
    3. तृतीय साका (1567-68 ई.): अकबर का आक्रमण (जयमल-फत्ता का केसरिया और फूल कंवर का जौहर)।

2. कुंभलगढ़ दुर्ग (Kumbhalgarh Fort)

यह दुर्ग मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा पर राजसमंद जिले में स्थित है। यह मेवाड़ के शासकों की ‘संकटकालीन राजधानी’ रहा है।

  • निर्माता व वास्तुकार: इसका निर्माण महाराणा कुंभा ने अपनी पत्नी कुंभलदेवी की स्मृति में करवाया था। इसका मुख्य वास्तुकार (Architect) ‘मंडन’ था।
  • दीवार की लंबाई (Great Wall of India): इस दुर्ग के चारों ओर 36 किलोमीटर लंबी एक प्राचीर (दीवार) है, जिसे ‘भारत की महान दीवार’ कहा जाता है। यह दीवार इतनी चौड़ी है कि इस पर 4 घुड़सवार एक साथ चल सकते हैं।
  • कटारगढ़ (Katargarh): दुर्ग का सबसे ऊँचा भाग कटारगढ़ कहलाता है, जो महाराणा कुंभा का निजी आवास था। ऊँचाई के कारण इसे ‘मेवाड़ की आँख’ कहा जाता है।
  • ऐतिहासिक महत्व: इसी दुर्ग के ‘बादल महल’ (जूनी कचहरी) में 9 मई 1540 को महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। पृथ्वीराज (उड़णा राजकुमार) की 12 खंभों की छतरी भी यहीं स्थित है।
  • अबुल फजल का कथन: इस दुर्ग की अत्यधिक ऊँचाई को देखकर अबुल फजल ने लिखा था: “यह दुर्ग इतनी बुलंदी (ऊँचाई) पर बना है कि नीचे से ऊपर देखने पर सिर की पगड़ी गिर जाती है।”

3. रणथंभौर दुर्ग (Ranthambore Fort)

सवाई माधोपुर जिले में स्थित यह दुर्ग चारों ओर से सघन वन और अरावली की सात पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

  • श्रेणी: घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के कारण इसे ‘एरण दुर्ग’ और ‘वन दुर्ग’ की श्रेणी में रखा जाता है।
  • निर्माता: इसका निर्माण 8वीं शताब्दी में चौहान शासक रणथंभन देव (या रतिदेव) द्वारा करवाया गया था। यह दुर्ग ‘थम्भ’ नामक पहाड़ी पर स्थित है।
  • प्रमुख दर्शनीय स्थल:
    1. त्रिनेत्र गणेश मंदिर: यह पूरे भारत का एकमात्र ऐसा गणेश मंदिर है जहाँ भगवान गणेश के केवल ‘मुख’ (चेहरे) की पूजा होती है। यहाँ भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को विशाल मेला लगता है।
    2. 32 खंभों की छतरी: इसे हम्मीर देव चौहान ने अपने पिता जैत्रसिंह के 32 वर्ष के शासन की याद में बनवाया था। हम्मीर यहीं बैठकर न्याय करते थे, इसलिए इसे ‘न्याय की छतरी’ भी कहते हैं।
    3. जोगी महल, पीर सदरुद्दीन की दरगाह, और पदमला तालाब (जहाँ जल जौहर हुआ था)।
  • अबुल फजल का कथन: इस किले की भौगोलिक स्थिति को देखकर अबुल फजल ने कहा था: “अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद (Armored) है।”
  • राजस्थान का प्रथम साका: यहाँ 11 जुलाई 1301 ई. में हम्मीर देव चौहान के समय अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के कारण राजस्थान का प्रथम साका और एकमात्र ‘जल-जौहर’ हुआ था।

अभ्यास हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न (20 Important Questions / PYQs)

प्रश्न 1: 2013 में राजस्थान के कितने पहाड़ी किलों को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था?

उत्तर: 6 किलों को (ट्रिक: चीकू गाजर आम)।

प्रश्न 2: “गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया” – यह प्रसिद्ध कहावत किस दुर्ग के लिए है?

उत्तर: चित्तौड़गढ़ दुर्ग के लिए।

प्रश्न 3: चित्तौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण किस मौर्य शासक ने करवाया था?

उत्तर: चित्रांगद मोरी ने।

प्रश्न 4: चित्तौड़गढ़ दुर्ग किन दो नदियों के संगम पर और किस पठार पर स्थित है?

उत्तर: गम्भीरी और बेड़च नदियों के संगम पर, मेसा के पठार पर।

प्रश्न 5: महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित ‘विजय स्तंभ’ कितनी मंजिला इमारत है?

उत्तर: 9 मंजिला (122 फीट ऊँचा)।

प्रश्न 6: चित्तौड़गढ़ दुर्ग का प्रथम साका (1303 ई.) किसके आक्रमण के समय हुआ था?

उत्तर: अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय।

प्रश्न 7: कुंभलगढ़ दुर्ग का मुख्य वास्तुकार (शिल्पी) कौन था?

उत्तर: मंडन।

प्रश्न 8: किस दुर्ग की 36 किलोमीटर लंबी दीवार को ‘भारत की महान दीवार’ (Great Wall of India) कहा जाता है?

उत्तर: कुंभलगढ़ दुर्ग की दीवार को।

प्रश्न 9: ‘मेवाड़ की आँख’ किस दुर्ग के सबसे ऊँचे भाग को कहा जाता है?

उत्तर: कटारगढ़ (कुंभलगढ़ दुर्ग) को।

प्रश्न 10: महाराणा प्रताप का जन्म किस दुर्ग में हुआ था?

उत्तर: कुंभलगढ़ दुर्ग (कटारगढ़ के बादल महल में)।

प्रश्न 11: “यह दुर्ग इतनी बुलंदी पर बना है कि नीचे से ऊपर देखने पर सिर की पगड़ी गिर जाती है” – अबुल फजल का यह कथन किस किले के बारे में है?

उत्तर: कुंभलगढ़ दुर्ग के बारे में।

प्रश्न 12: “अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है” – अबुल फजल ने यह किस दुर्ग के लिए कहा था?

उत्तर: रणथंभौर दुर्ग के लिए।

प्रश्न 13: राजस्थान का वह कौन सा दुर्ग है जो अपनी सघन वनस्पति के कारण ‘एरण दुर्ग’ की श्रेणी में आता है?

उत्तर: रणथंभौर दुर्ग।

प्रश्न 14: पूरे भारत का प्रसिद्ध ‘त्रिनेत्र गणेश मंदिर’ राजस्थान के किस दुर्ग में स्थित है?

उत्तर: रणथंभौर दुर्ग (सवाई माधोपुर) में।

प्रश्न 15: हम्मीर देव चौहान द्वारा निर्मित ’32 खंभों की छतरी’ (न्याय की छतरी) कहाँ स्थित है?

उत्तर: रणथंभौर दुर्ग में।

प्रश्न 16: राजस्थान का प्रथम साका और एकमात्र ‘जल-जौहर’ 1301 ई. में किस दुर्ग में हुआ था?

उत्तर: रणथंभौर दुर्ग में।

प्रश्न 17: चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित ‘कीर्ति स्तंभ’ किस जैन तीर्थंकर को समर्पित है?

उत्तर: प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) को।

प्रश्न 18: मीराबाई का मंदिर और संत रैदास की छतरी किस किले में स्थित है?

उत्तर: चित्तौड़गढ़ दुर्ग में।

प्रश्न 19: राजस्थान का सबसे बड़ा ‘लिविंग फोर्ट’ (Living Fort) कौन सा है?

उत्तर: चित्तौड़गढ़ दुर्ग।

प्रश्न 20: मेवाड़ के शासकों की ‘संकटकालीन राजधानी’ के रूप में कौन सा दुर्ग जाना जाता है?

उत्तर: कुंभलगढ़ दुर्ग।

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