राजस्थान की लोक देवियाँ: करणी माता, जीण माता, कैला देवी एवं अन्य प्रमुख लोक देवियाँ | Rajasthan Art & Culture Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान की लोक देवियाँ करणी माता जीण माता कैला देवी एवं अन्य प्रमुख लोक देवियाँ राजस्थान की लोक देवियाँ: करणी माता, जीण माता, कैला देवी एवं अन्य प्रमुख लोक देवियाँ | Rajasthan Art & Culture Notes for RPSC, CET, REET, Patwar, Police & All Competitive Exams 2026

राजस्थान की प्रमुख लोक देवियों जैसे करणी माता, जीण माता, कैला देवी, शाकंभरी माता, त्रिपुरा सुंदरी एवं अन्य प्रसिद्ध देवियों के मंदिर, मेले, इतिहास एवं परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्यों का सम्पूर्ण अध्ययन करें। RPSC, CET, REET, Patwar, Police, VDO एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण Rajasthan Art & Culture Notes।

परिचय राजस्थान में शक्ति पूजा का विशेष महत्व रहा है। यहाँ के राजवंशों, विभिन्न जातियों और आम जनमानस ने कई देवियों को अपनी ‘कुलदेवी’ (Clan Goddess) या ‘आराध्य देवी’ (Tutelary Goddess) के रूप में पूजा है।

  • कुलदेवी: वह देवी जिसके वंश में व्यक्ति जन्म लेता है (यह कभी नहीं बदलती)।
  • आराध्य देवी (इष्ट देवी): वह देवी जिसकी व्यक्ति अपनी श्रद्धा और इच्छा से पूजा करता है (यह बदल सकती है)।

प्रतियोगी परीक्षाओं (REET, KVS, RPSC, RSMSSB) में करणी माता के ‘काबा’, जीण माता के सबसे लंबे गीत, शीतला माता की खंडित मूर्ति और विभिन्न राजवंशों की कुलदेवियों से हर बार प्रश्न पूछे जाते हैं। महारथ अकादमी के आज के इस नोट्स में हम राजस्थान की प्रमुख लोक देवियों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

1. करणी माता (Karni Mata)

  • जन्म: सुवाप गाँव (जोधपुर) में चारण (कीनिया गोत्र) परिवार में। इनके बचपन का नाम ‘ऋद्धि बाई’ (Riddhi Bai) था।
  • प्रमुख मंदिर: देशनोक (बीकानेर)।
  • विशेषता: इन्हें ‘चूहों वाली देवी’ कहा जाता है। इनके मंदिर में हजारों चूहे निर्भय होकर घूमते हैं।
  • काबा (Kaba): करणी माता के मंदिर में पाए जाने वाले सफेद चूहों को ‘काबा’ कहा जाता है। काबा के दर्शन बहुत शुभ माने जाते हैं।
  • कुलदेवी: यह बीकानेर के राठौड़ राजवंश और चारण जाति की कुलदेवी हैं।
  • अन्य तथ्य: करणी माता ने ही जोधपुर के ‘मेहरानगढ़ दुर्ग’ की नींव रखी थी। ‘चील’ (Kite/Eagle) पक्षी को करणी माता का प्रतीक (स्वरूप) माना जाता है।

2. जीण माता (Jeen Mata)

  • प्रमुख मंदिर: रेवासा (सीकर) में काजल शिखर पहाड़ी पर। इस मंदिर का निर्माण चौहान शासक पृथ्वीराज प्रथम के समय हट्टड़ (मोहिल) ने करवाया था।
  • कुलदेवी: यह चौहानों की कुलदेवी और शेखावाटी क्षेत्र की आराध्य देवी हैं।
  • सबसे लंबा गीत: राजस्थानी लोक साहित्य में सभी देवी-देवताओं में सबसे लंबा लोकगीत (Longest Folk Song) जीण माता का ही है (जिसे कनफटे जोगी डमरू और सारंगी के साथ गाते हैं)।
  • विशेषता: इनके मंदिर में ढाई प्याले शराब का भोग लगता है। औरंगजेब ने इनके मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी, तब माता ने भंवरों (मधुमक्खियों) का रूप धारण कर मुग़ल सेना को भगा दिया था। इसलिए इन्हें ‘भंवरों वाली माता’ भी कहते हैं। इनके भाई ‘हर्ष’ का मंदिर भी पास ही पहाड़ी पर स्थित है।

3. शीतला माता (Sheetla Mata)

  • प्रमुख मंदिर: शील की डूंगरी, चाकसू (जयपुर ग्रामीण)। इस मंदिर का निर्माण जयपुर के महाराजा माधोसिंह प्रथम ने करवाया था।
  • उपनाम: चेचक की देवी (Goddess of Smallpox), सेढ़ल माता, महामाई और बच्चों की संरक्षिका।
  • खंडित मूर्ति: यह राजस्थान की एकमात्र ऐसी देवी हैं जिनकी खंडित रूप (Broken Idol) में पूजा की जाती है।
  • वाहन और पुजारी: शीतला माता का वाहन गधा (Donkey) और पुजारी कुम्हार (Potter) जाति का होता है।
  • त्यौहार: चैत्र कृष्ण अष्टमी को इनका त्यौहार ‘शीतला अष्टमी’ मनाया जाता है। इस दिन माता को ठंडे बासी भोजन (Basiyoda) का भोग लगाया जाता है।

4. कैला देवी (Kaila Devi)

  • प्रमुख मंदिर: त्रिकूट पर्वत, करौली (कालीसिल नदी के किनारे)।
  • कुलदेवी: यह करौली के यदुवंशी (यादव) राजवंश की कुलदेवी हैं। इन्हें भगवान कृष्ण की बहन और अंजनी माता का अवतार माना जाता है।
  • लांगुरिया गीत व नृत्य: कैला देवी के मेले (लक्खी मेला) में मीणा और गुर्जर जाति के भक्तों द्वारा ‘लांगुरिया’ (Languriya) गीत गाए जाते हैं और नृत्य किया जाता है।
  • विशेषता: यह पूर्णतः सात्विक देवी हैं, इनके मंदिर में कभी मांस या मदिरा का भोग नहीं लगता है।

5. आई माता (Aai Mata)

  • प्रमुख मंदिर: बिलाड़ा (जोधपुर ग्रामीण)।
  • कुलदेवी: यह सीरवी जाति (Sirvi Caste) की कुलदेवी हैं।
  • रामदेवजी की शिष्या: ये लोक देवता रामदेवजी की शिष्या थीं और इन्होंने भी समाज सुधार (छुआछूत मिटाने) के लिए ‘आई पंथ’ चलाया (जिसमें 11 नियम हैं)।
  • केसर टपकना: इनके मंदिर में जलने वाले दीपक (अखंड ज्योत) की लौ से काजल की जगह ‘केसर’ (Saffron) टपकती है
  • दरगाह व बडेर: इनके मंदिर को ‘दरगाह’ और थान को ‘बडेर’ कहा जाता है।

6. तनोट माता (Tanot Mata)

  • प्रमुख मंदिर: तनोट (जैसलमेर)।
  • उपनाम: थार की वैष्णो देवी (Vaishno Devi of Thar), सैनिकों की देवी (Goddess of Soldiers) और रूमाल वाली देवी।
  • विशेषता: 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानी सेना द्वारा गिराए गए बम इस मंदिर के प्रांगण में फटे नहीं थे। आज भी इस मंदिर की पूजा और व्यवस्था BSF (सीमा सुरक्षा बल) के जवानों द्वारा की जाती है।

7. राजस्थान के राजवंशों और जातियों की अन्य प्रमुख कुलदेवियां

  • शिला देवी (Shila Devi): इनका मंदिर आमेर (जयपुर) दुर्ग में है। इस अष्टभुजी मूर्ति को जयपुर के शासक मानसिंह प्रथम बंगाल (जसोर) के राजा केदार को हराकर लाए थे। यह कछवाहा राजवंश की आराध्य देवी हैं। (कछवाहों की कुलदेवी ‘जमवाय माता’ हैं जिनका मंदिर जमवारामगढ़ में है)।
  • ब्राह्मणी माता (Brahmani Mata): मंदिर – सोरसन (बारां)। यह विश्व की एकमात्र ऐसी देवी हैं जिनकी ‘पीठ’ (Back) की पूजा होती है और पीठ का ही शृंगार किया जाता है। यहाँ माघ शुक्ल सप्तमी को ‘गधों का मेला’ लगता है।
  • सच्चियाय माता (Sachiya Mata): मंदिर – ओसियां (जोधपुर ग्रामीण)। यह ओसवाल जाति की कुलदेवी हैं। इनका मंदिर गुर्जर-प्रतिहार शैली में बना हुआ है।
  • त्रिपुरा सुंदरी (Tripura Sundari): इन्हें ‘तुरताई माता’ भी कहते हैं। इनका मंदिर तलवाड़ा (बांसवाड़ा) में है। यह पांचाल जाति की कुलदेवी हैं।
  • राणी सती (Rani Sati): इनका मंदिर झुंझुनूं में है। इनका मूल नाम ‘नारायणी देवी’ था। लोग इन्हें प्यार से ‘दादी जी’ (Dadi ji) कहते हैं। यह अग्रवाल जाति की कुलदेवी हैं।
  • स्वांगिया माता (Swangiya Mata): यह जैसलमेर के भाटी राजवंश की कुलदेवी हैं। इनके हाथ में मुड़ा हुआ भाला (स्वांग) होता है। राजचिन्ह में ‘सुगन चिड़ी’ (पालम पक्षी) को इनका स्वरूप माना जाता है।
  • बाण माता (Ban Mata): यह मेवाड़ (उदयपुर) के गुहिल / सिसौदिया राजवंश की कुलदेवी हैं।
  • सुगाली माता: आउआ (पाली) के ठाकुरों की कुलदेवी। इनके 10 सिर और 54 हाथ हैं। इन्हें ‘1857 की क्रांति की देवी’ भी कहा जाता है।

अभ्यास हेतु 20 महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs)

प्रश्न 1: बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी कौन हैं, जिन्हें ‘चूहों वाली देवी’ कहा जाता है? उत्तर: करणी माता।

प्रश्न 2: करणी माता के मंदिर (देशनोक) में पाए जाने वाले सफेद चूहों को क्या कहा जाता है? उत्तर: काबा (Kaba)।

प्रश्न 3: राजस्थानी लोक साहित्य में किस लोक देवी का गीत सबसे लंबा (Longest Song) है? उत्तर: जीण माता का।

प्रश्न 4: ‘लांगुरिया’ गीत और नृत्य किस देवी के मेले (लक्खी मेले) का मुख्य आकर्षण हैं? उत्तर: कैला देवी (करौली)।

प्रश्न 5: करौली का यदुवंशी (यादव) राजवंश अपनी कुलदेवी के रूप में किसकी पूजा करता है? उत्तर: कैला देवी की।

प्रश्न 6: राजस्थान की वह कौन सी देवी हैं जिनकी ‘खंडित रूप’ (Broken Idol) में पूजा की जाती है? उत्तर: शीतला माता।

प्रश्न 7: शीतला माता का वाहन और उनके पुजारी क्रमशः कौन होते हैं? उत्तर: वाहन: गधा (Donkey), पुजारी: कुम्हार।

प्रश्न 8: किस लोक देवी के मंदिर की अखंड ज्योत से काजल की बजाय ‘केसर’ (Saffron) टपकती है? उत्तर: आई माता (बिलाड़ा, जोधपुर)।

प्रश्न 9: आई माता किस जाति की कुलदेवी हैं, जिनके मंदिर को ‘दरगाह’ कहा जाता है? उत्तर: सीरवी जाति की।

प्रश्न 10: ‘थार की वैष्णो देवी’ और ‘सैनिकों की देवी’ के रूप में किसे पूजा जाता है? उत्तर: तनोट माता (जैसलमेर) को।

प्रश्न 11: आमेर के शासक मानसिंह प्रथम किस देवी की मूर्ति बंगाल (जसोर) से जीतकर लाए थे? उत्तर: शिला देवी की मूर्ति।

प्रश्न 12: जयपुर के कछवाहा राजवंश की ‘कुलदेवी’ कौन हैं? उत्तर: जमवाय माता (जमवारामगढ़)। (शिला देवी आराध्य देवी हैं)।

प्रश्न 13: राजस्थान की वह एकमात्र देवी कौन हैं जिनकी केवल ‘पीठ’ (Back) की पूजा और शृंगार होता है? उत्तर: ब्राह्मणी माता (सोरसन, बारां)।

प्रश्न 14: ओसवाल जाति की कुलदेवी ‘सच्चियाय माता’ का प्रसिद्ध मंदिर कहाँ स्थित है? उत्तर: ओसियां (जोधपुर ग्रामीण) में।

प्रश्न 15: ‘त्रिपुरा सुंदरी’ या ‘तुरताई माता’ का मंदिर राजस्थान के किस जिले में स्थित है? उत्तर: तलवाड़ा, बांसवाड़ा जिले में।

प्रश्न 16: झुंझुनूं में स्थित ‘राणी सती’ (दादी जी) का वास्तविक (मूल) नाम क्या था? उत्तर: नारायणी देवी।

प्रश्न 17: 1857 की क्रांति की देवी किसे कहा जाता है, जिनकी मूर्ति के 10 सिर और 54 हाथ हैं? उत्तर: सुगाली माता को (आउआ)।

प्रश्न 18: ‘सुगन चिड़ी’ (पालम पक्षी) को किस लोक देवी का स्वरूप माना जाता है? उत्तर: स्वांगिया माता या आवड़ माता का (भाटी राजवंश की कुलदेवी)।

प्रश्न 19: मेवाड़ के गुहिल या सिसौदिया राजवंश की कुलदेवी कौन हैं? उत्तर: बाण माता।

प्रश्न 20: अलवर (राजगढ़) में स्थित नारायणी माता किस समाज की कुलदेवी हैं? उत्तर: नाई (सैनिक) समाज की।

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